किसानों की प्रमुख मांगों पर निर्णायक समाधान तक जारी रहेगा आंदोलन, मोर्चा ने तीनों प्राधिकरणों से जुड़े किसानों से की बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील
ग्रेटर नोएडा, सेक्टर-144 स्थित पेमे चौहान के आवास पर गुरुवार को किसान संघर्ष मोर्चा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मोर्चे से जुड़े विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट सहित किसानों की प्रमुख मांगों को लेकर 21 अक्टूबर 2026 से यमुना प्राधिकरण पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया जाएगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह महापड़ाव तब तक जारी रहेगा, जब तक किसानों की मांगों पर निर्णायक समाधान नहीं होता।
बैठक के बाद निर्णय की जानकारी देते हुए किसान संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा 17 जुलाई से लगातार आंदोलनरत है। इसके बाद 17 अगस्त तथा 9 से 16 सितंबर तक भी विभिन्न चरणों में आंदोलन किया गया। इस दौरान किसानों ने गिरफ्तारियां दीं और तीनों प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट के मुद्दे पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सोरन प्रधान ने कहा कि पुलिस कमिश्नर और प्राधिकरण के अधिकारियों की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया था कि 5 अक्टूबर तक शासन स्तर पर 10 प्रतिशत प्लॉट के मुद्दे पर वार्ता कराई जाएगी। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद ऐसी कोई वार्ता नहीं हुई, जिससे किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है।
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किसान सभा के जिला अध्यक्ष एवं किसान संघर्ष मोर्चा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि वर्ष 2023 में 124 दिनों के लगातार धरने के बाद तीनों प्राधिकरणों द्वारा किसानों के लिए 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट का प्रस्ताव शासन की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन अभी तक शासन स्तर से इसे स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भी बड़ी संख्या में किसानों ने गिरफ्तारी देकर आंदोलन किया, बावजूद इसके समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसानों ने लगातार शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें शासन और प्रशासन के सामने रखी हैं, लेकिन इस मामले में अपेक्षित गति से निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की ओर से लगातार वार्ता का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन वार्ता की कोई निश्चित तिथि तय नहीं की जा रही।
बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि शासन और प्रशासन द्वारा लगातार समय खींचे जाने के कारण किसानों के सामने अब आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसी के चलते 21 अक्टूबर से यमुना प्राधिकरण पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव का निर्णय लिया गया है।
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किसान संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि महापड़ाव के दौरान भी अधिकारियों के साथ वार्ता के रास्ते खुले रहेंगे, लेकिन आंदोलन को तभी समाप्त किया जाएगा जब 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून के लाभ तथा किसानों की अन्य प्रमुख मांगों पर ठोस एवं निर्णायक निर्णय लिया जाएगा।
किसान नेताओं ने कहा कि आबादी के मामलों, एसआईटी जांच, प्लॉटों के नियोजन और अन्य किसान समस्याओं पर प्राधिकरणों द्वारा या तो कार्रवाई नहीं की जा रही है अथवा बेहद धीमी गति से कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो किसानों की अनेक समस्याएं लंबे समय तक लंबित रह सकती हैं।
किसान संघर्ष मोर्चा ने तीनों प्राधिकरणों से जुड़े किसानों से अपील की है कि वे 21 अक्टूबर से यमुना प्राधिकरण पर शुरू होने वाले महापड़ाव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर आंदोलन को मजबूत करें।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में शिशांत भाटी, उम्मेद त्यागी, सचिन एडवोकेट, कुंवर पाल प्रधान, जयवीर प्रधान, जयप्रकाश आर्य, गुरप्रीत एडवोकेट, सुरेंद्र भाटी सहित किसान संघर्ष मोर्चा के दर्जनों नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।


