हस्तशिल्प निर्यात को एक अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य, नए बाजारों की तलाश और युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर जोर
ग्रेटर नोएडा, 13 अक्टूबर 2026। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में मंगलवार को 62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की ओर से आयोजित पांच दिवसीय मेले का उद्घाटन केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी मौजूद रहे। यह मेला 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मेले के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान की सराहना की। उन्होंने ईपीसीएच को भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और विदेशी खरीदारों, डिजाइनरों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने के प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट की भी सराहना करते हुए कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेले की प्रगति भारत की विकास यात्रा को दर्शाती है, जबकि एक्सपो सेंटर का विकास उत्तर प्रदेश की बढ़ती औद्योगिक क्षमता को उजागर करता है।
निर्यात बढ़ाने और नए बाजार तलाशने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को निर्यात बढ़ाने के लिए अपने प्रयासों का दायरा विस्तृत करना होगा। पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ उभरते और विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मजबूत उपस्थिति बनानी होगी। उन्होंने उद्योग जगत और ईपीसीएच से सामूहिक प्रयासों के जरिए हस्तशिल्प निर्यात को एक अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
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उन्होंने मेले में खरीदारों और प्रदर्शकों की बढ़ती भागीदारी पर संतोष जताया। साथ ही, शुल्क में कटौती से पंजीकरण बढ़ने का उल्लेख करते हुए प्रदर्शकों से इस मंच का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से जोड़ने तथा नए व्यापारिक अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
युवा उद्यमियों और नए निर्यातकों को मिलेगा प्रोत्साहन
गिरिराज सिंह ने हस्तशिल्प क्षेत्र में नए निर्यातकों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों की संख्या कम से कम 10 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों को अनुभवी निर्यातकों से सीखने और हस्तशिल्प, डिजाइन तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने जमीनी स्तर पर हस्तशिल्प उद्योग को मजबूत करने के लिए मौजूदा क्राफ्ट क्लस्टरों के विकास, नए क्लस्टर तैयार करने और हथकरघा, हस्तशिल्प एवं टेक्सटाइल की क्षमताओं की जिलावार मैपिंग करने की आवश्यकता भी बताई। इसके साथ ही, कारोबारियों को नए बाजारों तक पहुंचाने और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने के लिए फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित करने पर जोर दिया।
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वैश्विक गिफ्ट और डेकोर बाजार में भारत की संभावनाएं
केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक गिफ्ट एवं डेकोर बाजार की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय हस्तशिल्प में अपनी पारंपरिक कलाओं, उत्कृष्ट कारीगरी और रचनात्मक डिजाइन के दम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बनाने की क्षमता है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घरेलू और विदेशी बाजारों में भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मेले के पहले दिन अमेरिका और यूरोप सहित भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों से बड़ी संख्या में खरीदार पहुंचे। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में हस्तशिल्प क्षेत्र के निर्माताओं, निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को व्यापारिक संपर्क बढ़ाने, नए उत्पादों को प्रदर्शित करने तथा कारोबारी संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलेगा।
आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर प्रोत्साहित करने, निर्यात के नए अवसर तलाशने और देश के कारीगरों व उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन है।
इस अवसर पर, केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने ईयूडीआर अनुपालन एप्लिकेशन भी लॉन्च किया, जो लकड़ी और लकड़ी के उत्पादों की कानूनी सोर्सिंग और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए एक ईपीसीएच पहल है । एप्लिकेशन का उद्देश्य लकड़ी की उत्पत्ति, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला को ट्रैक करना है, जिससे पारदर्शिता और जिम्मेदार व्यापार को बढ़ावा मिलता है ।
गेस्ट ऑफ ऑनर श्री पबित्रा मार्गेरिटा, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और कपड़ा राज्य मंत्री, भारत सरकार ने मेले के एक हॉल से बढ़कर लगभग 3,000 प्रदर्शकों का स्वागत करने वाले कार्यक्रम में विकसित होने के बारे में बात की । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मेला न केवल व्यापार और आर्थिक विकास का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही भारत की पारंपरिक शिल्प कौशल और कौशल के संरक्षण का भी प्रतिनिधित्व करता है । उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजारों तक ले जाने में प्रदर्शकों के निरंतर प्रयासों की सराहना की ।
आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 के उद्घाटन समारोह में डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच; ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार; श्री सागर मेहता, उपाध्यक्ष, ईपीसीएच; श्री अवधेश अग्रवाल, अध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली मेला – ऑटम 2026 स्वागत समिति; उपाध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली मेला – ऑटम 2026 स्वागत समिति – श्री प्रदीप मुछाला, श्री प्रियेश भंडारी, श्री राजेश कुमार जैन, श्री सलमान आजम, श्री आर बी लाहोटी; श्री राजेश रावत कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच; प्रमुख विदेशी खरीदार, भारत के खरीद एजेंट और साथ ही ईपीसीएच के प्रमुख सदस्य निर्यातक भी उपस्थित रहे. इस संस्करण ने होम, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर और इंटीरियर उत्पादों के विस्तृत उत्पाद खंडों के लिए 17 समर्पित हॉलों में 3000 से अधिक प्रदर्शकों को एक साथ लाया है । हॉल में प्रदर्शक बूथों के अलावा, आगंतुकों के पास इंडिया एक्सपो सेंटर के विभिन्न स्तरों पर स्थित प्रमुख निर्यातकों के 900 मार्ट/स्थायी शोरूम तक पहुंच है, जो सोर्सिंग के दिनों के लिए सजाए गए हैं और फिर से भरे हुए हैं ।
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने मेले में उपस्थित लोगों का स्वागत किया और सभी प्रदर्शकों और प्रतिभागियों की सफलता की कामना की । उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्रों को बढ़ावा देना जारी रखने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया । उन्होंने कहा, “आईएचजीएफ दिल्ली मेले में सभी प्रतिभागियों का स्वागत करना सौभाग्य की बात है, जो प्रत्येक संस्करण के साथ हमारी शानदार यात्रा को आगे बढ़ाता है, भारत के कुछ बेहतरीन शिल्पों के लिए एक समृद्ध सोर्सिंग मंच प्रदान करता है । प्रत्येक संस्करण व्यापार के नए अवसर पैदा करता है, खरीदारों के साथ संबंध बनाता है और पहले के मुकाबले अधिक उत्पादों को प्रदर्शित करता है ।” खरीदार की भागीदारी के बारे में उन्होंने कहा, “हाल के महीनों में, ईपीसीएच ने प्रमुख यूरोपीय मेलों में भाग लिया, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ा, और कई लोगों ने इस संस्करण में भाग लेने के लिए हमारे निमंत्रण स्वीकार किए ।”
ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और उद्योग के लिए एमएसएमई, ग्रामीण हस्तशिल्प और कारीगरों के महत्व पर प्रकाश डाला । उन्होंने केंद्रीय वस्त्र मंत्री की पहल की सराहना की, विशेष रूप से जलकुंभी शिल्प को बढ़ावा देने वाली ‘जलकुंभी’ परियोजना, जिससे कारीगरों और प्रदर्शकों को लाभ हुआ है । उन्होंने ईपीसीएच और हस्तशिल्प क्षेत्र में भारत सरकार के केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और कपड़ा राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा के योगदान की भी सराहना की । उन्होंने बताया कि स्टॉल लगाने के कम से कम खर्च को 8,500 रुपये से घटाकर 2,500 रुपये करने से रजिस्ट्रेशन में 22% की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि प्रदर्शकों से कहा गया था कि वे इस बचत का इस्तेमाल खरीदारों की मेहमाननवाजी, प्रोडक्ट और डिस्प्ले डिजाइन को बेहतर बनाने और विदेशी आगंतुकों के अनुभव को सुधारने में करें ।
ईपीसीएच उपाध्यक्ष श्री सागर मेहता ने कहा, “हमारे प्रदर्शकों ने बदलते मार्केट ट्रेंड्स और इंटरनेशनल खरीदारों की पसंद को ध्यान में रखते हुए प्रोडक्ट डिजाइन और डेवलपमेंट में काफी मेहनत की है. बड़ी संख्या में आ रहे खरीदारों का उत्साहपूर्ण रिस्पॉन्स इस एडिशन के प्रति सकारात्मक माहौल को दिखाता है, जिसमें नए और पुराने दोनों तरह के विजिटर्स इस गति को बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं ।” इसके साथ ही, आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 के स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री अवधेश अग्रवाल ने कहा, “हर एडिशन नए बिजनेस अवसरों के लिए एक गतिशील उत्प्रेरक का काम करता है- यह खरीदारों के साथ नए संबंध बनाता है और साथ ही लगातार बदलते और बढ़ते प्रोडक्ट रेंज को प्रदर्शित करता है । ग्लोबल सोर्सिंग ट्रेंड्स और खरीदारों की बदलती उम्मीदों के साथ कदम मिलाकर चलते हुए, यह एडिशन उत्पादों में विविधता, खरीदार-विक्रेता के बीच बेहतर जुड़ाव और डिजाइन-आधारित, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर खास फोकस दिखाता है ।”
पहले दिन आए आगंतुकों की संख्या पर टिप्पणी करते हुए, आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 के स्वागत समित के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप मुछला ने कहा, “यह आयोजन विदेशी खरीदारों, बाइंग हाउस, एजेंटों और घरेलू स्तर पर बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वालों की जबरदस्त भागीदारी के साथ आगे बढ़ रहा है. पुराने संबंधों के साथ-साथ नई साझेदारियां भी बन रही हैं, क्योंकि खरीदार पहली बार आए सप्लायर्स के नए और अनोखे प्रोडक्ट्स और दोबारा हिस्सा ले रहे प्रदर्शकों के ट्रेंड-फॉरवर्ड कलेक्शन्स को देख रहे हैं ।”
आईएचजीएप दिल्ली मेला–ऑटम 2026 के स्वागत समिति के उपाध्यक्ष श्री प्रियेश भंडारी ने कहा, “तीन दशकों से अधिक समय से हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के आयोजनों में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का भरोसा और भागीदारी लगातार इस मेले की अहमियत को दिखाती है । यह संस्करण एक शानदार माहौल में शुरू हुआ है, जिसमें प्रदर्शन हॉल में लोगों की अच्छी-खासी भीड़ और दिन भर काम के सिलसिले में जरूरी बातचीत हो रही है ।”
“खरीदारों के सक्रिय रजिस्ट्रेशन, हलचलों से भरे हॉल और सार्थक व्यावसायिक व्यस्तताओं के साथ मेला बहुत उत्साह के साथ शुरू हुआ, जो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के निरंतर विश्वास को दर्शाता है ।”आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 के स्वागत समिति के उपाध्यक्ष श्री राजेश कुमार जैन और श्री सलमान आजम ने मेले के मुख्य मकसद पर जोर दिया: नए बिजनेस को बढ़ावा देना और कारीगरों व निर्यातकों को डिजाइन आधारित कलेक्शन पेश करने में मदद करना । उन्होंने अगले तीन दिनों में होने वाले नॉलेज सेशन की जानकारी भी दी, जिनमें ये विषय शामिल हैं: ग्लोबल बायर ट्रेंड्स 2027 (होम, लाइफस्टाइल, फैशन और इंटीरियर्स); प्रोडक्शन और सोर्सिंग में एआई (एक्सपोर्टर्स के लिए गाइड); एआई, जीईओ और एईओ (ऑनलाइन विजिबिलिटी से ग्लोबल ऑर्डर तक); ईयूडीआर कंप्लायंस और सप्लाई-चेन ट्रेसेबिलिटी; ईयू पैकेजिंग रेगुलेशन (पीपीडब्ल्यूआर) (एक्सपोर्टर्स के लिए कंप्लायंस); भारत के एफटीए (मार्केट एक्सेस और सोर्सिंग के मौके); और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन: फाइनेंशियल और मार्केट सपोर्ट ।
आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 के स्वागत समिति के उपाध्यक्ष श्री आरबी लाहोटी ने कहा, “भारत की निरंतर आर्थिक तरक्की के बीच आईएचजीएफ दिल्ली मेला निर्यातकों की पहुंच का विस्तार कर रहा है, नित नए बाजार खोल रहा है और स्थायी अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को लगातार बढ़ावा देना जारी रख रहा है ।” उन्होंने कहा कि मेले में सोर्सिंग सलाहकारों, प्रमुख भारतीय खुदरा और ऑनलाइन ब्रांडों के प्रतिनिधियों और घरेलू वॉल्यूम खरीदारों के साथ-साथ 100 से अधिक देशों के खरीदारों को आकर्षित करने की उम्मीद है, जिससे एक प्रमुख वैश्विक सोर्सिंग गंतव्य के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होगी ।
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक, श्री राजेश रावत ने कहा, “प्रत्येक संस्करण बिजनेस के नए अवसर पैदा करता है और खरीदारों के साथ रिश्ते मजबूत करने के साथ ही उत्पादों की रेंज भी बढ़ाता है. वैश्विक सोर्सिंग ट्रेंड्स और खरीदारों की पसंद को ध्यान में रखते हुए, इस संस्करण में ज्यादा तरह के उत्पादों, खरीदारों और विक्रेताओं के बीच बेहतर तालमेल और डिजाइन पर आधारित वैल्यू एडेड कलेक्शंस पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है ।”
ईपीसीएच देश से दुनिया भर के विभिन्न स्थानों पर हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प के भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेशों में भारत की छवि पेश करने के लिए एक नोडल संस्थान है । ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने बताया कि साल 2025-26 के दौरान कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,168 करोड़ रुपये (3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का हुआ था


