ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर पीड़ित किसानों का एक दिवसीय अनशन, शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की मांग दोहराई
- ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसानों का एक दिवसीय अनशन, शेष 4% विकसित भूखंड की मांग तेज
- 4% विकसित भूखंड के लिए किसानों का हल्ला बोल, प्राधिकरण पर किया अनशन
- शेष 4% प्लॉट नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन, किसानों की चेतावनी
- एक माह का अल्टीमेटम: 4% भूखंड की मांग पर किसानों का अनशन समाप्त
- 4% विकसित भूखंड की मांग को लेकर हजारों किसान प्राधिकरण पर जुटे
- किसानों के अनशन के बाद प्राधिकरण का आश्वासन, एक माह में समाधान का वादा
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण पर सोमवार को शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड की मांग को लेकर पीड़ित किसानों ने सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक एक दिवसीय अनशन किया। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए।
किसानों ने बताया कि वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी रामारमन के साथ हुए समझौते के तहत किसानों को 64.7 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा और 10 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड दिए जाने का निर्णय हुआ था। किसानों का कहना है कि बढ़े हुए मुआवजे का लाभ तो मिल गया, लेकिन 10 प्रतिशत विकसित भूखंड में से शेष 4 प्रतिशत भूखंड आज तक आवंटित नहीं किए गए हैं।
अनशन के दौरान किसानों ने कहा कि वर्षों से लंबित इस मांग का शीघ्र समाधान किया जाए तथा वर्ष 2011 के समझौते को पूर्ण रूप से लागू किया जाए। किसानों का कहना था कि लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे प्रभावित परिवारों को अब और इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।
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शाम करीब 5:00 बजे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव धरना स्थल पहुंचे और किसान प्रतिनिधियों से वार्ता की। वार्ता के दौरान उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि एक माह के भीतर उनकी मांगों के समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद एसीईओ ने किसानों को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।
अनशन समाप्त होने के बाद किसान नेताओं ने कहा कि यदि एक माह के भीतर शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड के संबंध में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान पुनः ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी लंबित मांगों का समाधान नहीं हो जाता।
आंदोलन में बड़ी संख्या में वंचित किसानों, महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों ने भागीदारी की। किसानों ने कहा कि वे अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
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