विभाजन विभीषिका से सबक लेकर मजबूत और एकजुट भारत के निर्माण का संकल्प लें: मुख्यमंत्री योगी
सीएम योगी ने कहा—विभाजन केवल भूमि का बंटवारा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की पीड़ा और विस्थापन का इतिहास
लखनऊ, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 के विभाजन की त्रासदी को मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सबक लेकर वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, एकजुट और विकसित भारत का निर्माण करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन केवल भारत की भूमि का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह लाखों परिवारों के विस्थापन, पीड़ा और संघर्ष का इतिहास है। विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर-बार छोड़कर शरणार्थी बनने के लिए मजबूर होना पड़ा। हिंसा और विस्थापन की उस त्रासदी की स्मृतियां आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका से संबंधित पेंटिंग एवं प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां नई पीढ़ी को उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
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इतिहास से सीखना और आने वाली पीढ़ी को सच्चाई बताना जरूरी
सीएम योगी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है। इतिहास हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करने के साथ-साथ अतीत की गलतियों से सीखने और उन्हें दोबारा न दोहराने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि विभाजन की परिस्थितियां कैसे बनीं और उससे देश तथा समाज को क्या सीख मिली।
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान निर्दोष नागरिकों को भारी पीड़ा झेलनी पड़ी। लाखों लोगों ने अपना घर, संपत्ति और अपनी जन्मभूमि तक छोड़ दी। इसलिए विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की किताबों तक सीमित न रखकर समाज और नई पीढ़ी को इससे मिलने वाले सबक से अवगत कराना आवश्यक है।
आंतरिक विभाजन से कमजोर होता है राष्ट्र
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत के इतिहास में देश की कमजोरी का एक बड़ा कारण आंतरिक विभाजन और आपसी अंतर्विरोध भी रहे हैं। क्षेत्र, भाषा, जाति और अन्य आधारों पर होने वाले विभाजन का लाभ हमेशा भारत विरोधी ताकतों को मिला है।
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उन्होंने कहा कि भारत के पास कभी शक्ति, बुद्धि और वैभव की कमी नहीं रही। इसके बावजूद देश को लंबे समय तक गुलामी का सामना करना पड़ा। समाज में मौजूद आपसी मतभेदों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों ने बाहरी शक्तियों को अवसर दिया। इसलिए देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
सबसे बड़ी पहचान भारतीय होने की हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति की क्षेत्रीय, भाषाई या सामाजिक पहचान अपनी जगह हो सकती है, लेकिन सबसे बड़ी पहचान भारतीय होने की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता तभी मजबूत होगी, जब प्रत्येक नागरिक राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेगा।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अनेक महानायकों और क्रांतिकारियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई और वीर सावरकर सहित अनेक महापुरुषों ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाना चाहिए।
हर नागरिक की जिम्मेदारी है राष्ट्र की एकता और सुरक्षा
सीएम योगी ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सरकार या सेना की जिम्मेदारी नहीं है। सीमा पर तैनात जवान देश की रक्षा करते हैं, लेकिन राष्ट्र की आंतरिक एकता, सामाजिक सद्भाव और अखंडता को मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे विभाजन की त्रासदी से सबक लेते हुए एकजुट, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को ऐसा भारत देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, जहां राष्ट्रहित सर्वोपरि हो और देश की एकता एवं अखंडता को कोई ताकत कमजोर न कर सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें अपने अतीत को समझने, शहीदों एवं पीड़ितों को स्मरण करने और भविष्य के भारत को अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।


