75 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, पेटेंट, डिजाइन फाइलिंग और नवाचारों के संरक्षण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता मिशन (NIPAM) के अंतर्गत राजीव गांधी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रबंधन संस्थान (RGNIIPM), भारत सरकार, नागपुर के सहयोग से बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), पेटेंट एवं डिजाइन फाइलिंग विषय पर ऑनलाइन जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता श्री कुमार राजू, सहायक नियंत्रक, पेटेंट एवं डिजाइन, RGNIIPM, नागपुर रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों की मूल अवधारणाओं के साथ-साथ पेटेंट एवं औद्योगिक डिजाइन के महत्व, पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया तथा नवाचार एवं शोध कार्यों को सुरक्षित रखने के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
देशभर से 75 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 75 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इनमें संकाय सदस्य, शोधार्थी, विद्यार्थी, नवप्रवर्तक एवं उद्यमी शामिल रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ से आईपीआर और पेटेंट प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
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नवाचारों को पेटेंट के रूप में विकसित करने पर जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) धीरज गुप्ता, निदेशक, जीएनआईओटी (इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट) के प्रेरणादायी संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार आधारित शिक्षा और अनुसंधान की मजबूत आधारशिला हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अपने शोध और नवाचारों को पेटेंट के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि भारत को वैश्विक ज्ञान एवं नवाचार केंद्र बनाने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बौद्धिक संपदा का संरक्षण उसके सृजन जितना ही महत्वपूर्ण है।
पेटेंट फाइलिंग से जुड़े सवालों का मिला समाधान
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को पेटेंट की पात्रता, प्रायर आर्ट सर्च, पेटेंट फाइलिंग प्रक्रिया, औद्योगिक डिजाइन तथा नवाचारों के व्यावसायीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ से विभिन्न व्यावहारिक सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित गुप्ता के मार्गदर्शन एवं सतत सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। कार्यशाला का सफल समन्वयन डॉ. श्रीजा एवं श्री मुकुल अत्री द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजकों की ओर से कार्यशाला में सफलतापूर्वक प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र प्रदान किए जाने की घोषणा की गई।
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और नवप्रवर्तकों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नवाचारों के संरक्षण को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।






