प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में सीएम योगी का आह्वान—युवा बनेंगे भारत के भाग्य विधाता, समाज को बांटने वाली ताकतों से रहें सतर्क
लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटा हुआ नहीं, बल्कि एकजुट और सशक्त राष्ट्र बनाना है। उन्होंने कहा कि देश को ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ाना होगा। आज का युवा भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के संस्कार विकसित करें।
मुख्यमंत्री रविवार को राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने मां गायत्री, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने स्मारिका का विमोचन करने के साथ भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार की भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से प्रदेश में 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े हैं। यह अभियान नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
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गायत्री परिवार ने यज्ञ की वेदी पर सर्वसमाज को जोड़ा
सीएम योगी ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और परंपराओं के प्रति समर्पण के साथ गायत्री परिवार की स्थापना की। गायत्री परिवार ने यज्ञों के माध्यम से सर्वसमाज को एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता और समरसता का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के सामने अगले 100 वर्षों के लिए नए लक्ष्य तय करने की चुनौती है। दुनिया में तनाव और संघर्ष के बीच मानवता को सकारात्मक दिशा देने तथा समाज में बिखराव को रोकने में ऐसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
1923, 1925 और 1926 में स्थापित हुईं तीन संस्थाएं, लक्ष्य रहा राष्ट्र जागरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि तीनों की कार्यपद्धति और स्थान अलग रहे, लेकिन समाज की चेतना को जागृत करने और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का उद्देश्य महत्वपूर्ण रहा।
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उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए भौतिक शक्ति के साथ आध्यात्मिक और नैतिक शक्ति भी आवश्यक है।
विचार पर आधारित संगठन लंबे समय तक करता है कार्य
सीएम योगी ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य चाहते तो संगठन को अपने नाम से चला सकते थे, लेकिन उन्होंने व्यक्ति से ऊपर विचार और परिवार को महत्व दिया। इसी कारण संस्था का नाम गायत्री परिवार रखा गया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति आधारित संगठन सीमित समय तक प्रभावी रहते हैं, जबकि विचार आधारित संगठन लंबे समय तक समाज को दिशा देते हैं।
शिक्षक समाज की चेतना और युग निर्माण के वाहक
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युग निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि जब शिक्षक जागरूक होकर ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करता है तो देश को विश्वगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता।
उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों तथा गुरु-शिष्य परंपरा की चर्चा की। उन्होंने महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम, महर्षि सांदीपनि-श्रीकृष्ण और चाणक्य-चंद्रगुप्त के उदाहरण देते हुए भारतीय शिक्षा परंपरा को पुनः मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
समाज को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने का आह्वान
सीएम योगी ने कहा कि आज भी कुछ तत्व क्षेत्र, जाति और भाषा के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विभाजनकारी प्रवृत्तियों के प्रति समाज और नई पीढ़ी को जागरूक करें तथा सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि यज्ञ की भावना समाज को ‘यह मेरा नहीं’ के भाव से जोड़ती है। प्रकृति, पेड़, जलस्रोत, गंगा और सूर्य किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। इसी भावना के साथ समाज को भी एकता और समरसता के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
यूपी में 2017 से अब तक 275 करोड़ पौधरोपण का दावा
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 से 2026 तक उत्तर प्रदेश में 275 करोड़ पौधरोपण किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधे लगाए गए हैं और उनके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने नदियों को जीवन की धमनियों के समान बताते हुए कहा कि नदियों को प्रदूषण से बचाना और उन्हें अविरल-निर्मल बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नदी पुनर्जीवन से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया।
2047 के भारत के लिए कर्तव्यबोध जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को विकसित और सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार होना होगा। उन्होंने गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने, अपनी विरासत पर गर्व करने, सामाजिक समता के लिए कार्य करने और नागरिक कर्तव्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन करे तो भारत को दुनिया में नेतृत्व करने से कोई रोक नहीं सकता। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में नई पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 विद्यालय सम्मानित
कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्यालयों में सीतापुर इंटर कॉलेज, आशुतोष बृज मोहन लाल मेमोरियल कॉलेज, चंद्रशेखर मेमोरियल पब्लिक स्कूल रायबरेली, लखनऊ पब्लिक स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल लखनऊ, डॉ. केएन मोदी साइंस एंड कॉमर्स इंटर कॉलेज गाजियाबाद, शिव प्रताप इंटर कॉलेज अमेठी, अमर सिंह इंटर कॉलेज बुलंदशहर, चित्रकूट इंटर कॉलेज तथा एमजी पब्लिक स्कूल मुजफ्फरनगर शामिल रहे।
नई पीढ़ी में भारतीय मूल्यों की स्थापना जरूरी: डॉ. चिन्मय पंड्या
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, स्वार्थ और संकीर्णता आज मानव समाज के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने धर्म, न्याय, नीति, मूल्य और सदाचार को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के मूल भाव और जीवन मूल्यों से जोड़ना है।
कार्यक्रम में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह, केंद्रीय जोन प्रभारी परमानंद द्विवेदी, समन्वयक रामयश तिवारी सहित गायत्री परिवार के स्वयंसेवक और प्रदेशभर से आए शिक्षक उपस्थित रहे।


