250 से अधिक किसान कार्यकर्ताओं ने उठाए किसानों के ज्वलंत मुद्दे, एसआईटी मामलों के निस्तारण के लिए 2 से 3 सप्ताह का आश्वासन; 64.7% अतिरिक्त मुआवजे और आबादी के मामलों पर भी हुई ठोस चर्चा
ग्रेटर नोएडा,
किसानों के लंबित मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर किसान संघर्ष मोर्चा के आंदोलन और लगातार संघर्ष के बाद गुरुवार को यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के साथ महत्वपूर्ण वार्ता हुई। बैठक में किसान संघर्ष मोर्चा के 250 से अधिक कार्यकर्ताओं एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वार्ता के दौरान 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, ग्रेटर नोएडा के एसआईटी से संबंधित लंबित मामले, यमुना प्राधिकरण के 521 आबादी प्रकरण, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित युवाओं को रोजगार तथा पुनर्वास के अंतर्गत आवंटित मकानों की रजिस्ट्री सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
किसान संघर्ष मोर्चा के अनुसार, अधिकांश मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। कई मामलों में समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, जबकि कुछ विषयों पर अभी ठोस सहमति नहीं बन सकी। बैठक में हुई चर्चा और सहमतियों का कार्यवृत्त तैयार किया गया है। उसकी आधिकारिक प्रतिलिपि प्राप्त होने के बाद सार्वजनिक की जाएगी।
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21 अक्टूबर के आंदोलन के बाद अधिकारियों के साथ हुई महत्वपूर्ण वार्ता
गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को यमुना प्राधिकरण पर किसान संघर्ष मोर्चा के आंदोलन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच भारी टकराव हुआ था। इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों को गिरफ्तार किया गया और 12 किसानों को जेल भेजा गया था। अगले दिन सभी 12 किसानों को रिहा कर दिया गया।
इसके बाद किसान संघर्ष मोर्चा ने किसानों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को प्रमुखता से उठाया। इसी क्रम में 29 अक्टूबर को हुई वार्ता में किसानों ने अधिकारियों के सामने अपने मुद्दे विस्तार से रखे और उनके समयबद्ध निस्तारण की मांग की।
1. दस प्रतिशत आबादी भूखंड के मुद्दे पर शासन स्तर पर पैरवी का आश्वासन
दस प्रतिशत आबादी भूखंड के मुद्दे पर अधिकारियों ने बताया कि यमुना प्राधिकरण के बोर्ड से संबंधित प्रस्ताव पहले ही शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जा चुका है। प्राधिकरण की ओर से शासन स्तर पर इस मामले को सकारात्मक ढंग से उठाने का आश्वासन दिया गया।
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किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की ओर से जानकारी दी गई है कि इस विषय पर 13 नवंबर को औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार सिंह के साथ वार्ता निर्धारित है।
किसान संघर्ष मोर्चा ने मांग की कि इस बैठक में तीनों प्राधिकरणों के संबंधित अधिकारी किसान प्रतिनिधियों के साथ उपस्थित रहें, ताकि किसानों की दस प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग पर शासन स्तर पर प्रभावी चर्चा हो सके और समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लिया जा सके।
2. ग्रेटर नोएडा के एसआईटी मामलों का दो से तीन सप्ताह में निस्तारण करने का आश्वासन
ग्रेटर नोएडा के आबादी प्रकरणों से संबंधित एसआईटी की लंबित जांच रिपोर्ट का मुद्दा बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि इन मामलों के लंबित रहने के कारण प्रभावित किसान लंबे समय से परेशान हैं और उन्हें न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
मोर्चा ने तीन प्रमुख श्रेणियों के लंबित मामलों को उठाया:
- शिफ्टिंग से संबंधित 211 मामले अभी लंबित हैं।
- बादलपुर के 208 प्रकरणों की रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई है।
- एसआईटी के अन्य 151 मामलों की रिपोर्ट भी लंबित है।
किसान संघर्ष मोर्चा ने इन सभी मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की। वार्ता के दौरान मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने मामलों की लंबित स्थिति पर कार्रवाई करते हुए आगामी दो से तीन सप्ताह के भीतर निस्तारण की प्रक्रिया पूरी करने का आश्वासन दिया।
मोर्चा ने इसे महत्वपूर्ण प्रगति बताते हुए कहा कि अब अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। किसानों को वास्तविक न्याय मिलने पर ही इस पहल की सफलता मानी जाएगी।
3. यमुना प्राधिकरण के 521 आबादी प्रकरणों पर दोबारा सुनवाई की मांग पर सहमति
यमुना प्राधिकरण के आबादी प्रकरणों में लंबित कार्रवाई और पहले स्वीकृत मामलों को लेकर पैदा हुई समस्याओं का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया गया।
किसान संघर्ष मोर्चा के अनुसार, पहले 306 आबादी प्रकरण स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से जांच के बाद केवल 100 मामलों को सही पाया गया। इसके परिणामस्वरूप शेष 206 किसानों की पहले से स्वीकृत लीज प्रभावित हुई है।
इसके अतिरिक्त 221 अन्य मामले लंबित बताए गए, जिनमें से लगभग 190 मामलों को खारिज कर दिया गया है।
मोर्चा ने अधिकारियों के समक्ष स्पष्ट किया कि आबादी के निर्धारण में संबंधित नियमावली का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। इसके अंतर्गत केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि पशुओं के चारे के स्थान, कुएं, पेड़ और अन्य निर्धारित मानकों को भी ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।
किसान संघर्ष मोर्चा ने मांग की कि किसी भी किसान का मामला बिना उचित सुनवाई के खारिज नहीं किया जाए और सभी खारिज मामलों की दोबारा सुनवाई कर नियमानुसार निस्तारण किया जाए।
वार्ता में खारिज मामलों की पुनः सुनवाई शुरू करने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस प्रक्रिया को प्रारंभ किया जाएगा।
4. 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के वितरण में तेजी लाने का आश्वासन
किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने में हो रही देरी का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि किसानों को उनके हक का मुआवजा मिलने में लगभग दस वर्ष की देरी हो चुकी है। इस देरी के कारण महंगाई बढ़ने से मुआवजे की वास्तविक कीमत भी काफी कम हो गई है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने जानकारी दी कि कुल 4,200 करोड़ रुपये के मुआवजे में से लगभग 3,200 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं, जबकि करीब 1,000 करोड़ रुपये का वितरण अभी शेष है।
अधिकारी ने आश्वासन दिया कि प्राधिकरण अपने हिस्से के मुआवजे का भुगतान तेजी से करेगा। साथ ही, संबंधित कंपनियों पर भी दबाव बनाकर शेष मुआवजे का जल्द वितरण कराने का प्रयास किया जाएगा।
किसान संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि मुआवजे से वंचित किसानों को उनका पूरा अधिकार मिलने तक इस मुद्दे को लगातार उठाया जाता रहेगा।
5. जेवर एयरपोर्ट प्रभावित युवाओं के स्थायी रोजगार का मुद्दा अभी अनसुलझा
जेवर एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित किसान परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार देने का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया।
किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों के तहत प्रभावित परिवारों के रोजगार का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद एयरपोर्ट से प्रभावित किसान परिवारों के युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
इस पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि एयरपोर्ट परियोजना में स्थायी प्रकृति के रोजगार उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश रोजगार वेंडर कंपनियों के माध्यम से दिए जाते हैं।
इस मुद्दे पर बैठक में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। किसान संघर्ष मोर्चा ने इसे गंभीर विषय बताते हुए स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार दिलाने की मांग पर संघर्ष जारी रहेगा।
6. पुनर्वास के तहत आवंटित मकानों की रजिस्ट्री जल्द कराने का आश्वासन
पुनर्वास के अंतर्गत किसानों एवं प्रभावित परिवारों को आवंटित मकानों की रजिस्ट्री लंबे समय से लंबित होने का मुद्दा भी उठाया गया।
मोर्चा ने मांग की कि आवंटित मकानों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को अपने मकानों पर विधिक अधिकार मिल सकें।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने इस संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया। किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि इस आश्वासन को समयबद्ध कार्रवाई में बदलना आवश्यक है।
किसान नेताओं ने कहा—आश्वासन नहीं, धरातल पर चाहिए परिणाम
सुखबीर खलीफा, नेता किसान संघर्ष मोर्चा, ने कहा कि संगठन किसानों के अधिकारों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसानों के किसी भी मुद्दे को अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा। जब तक सभी लंबित समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, संघर्ष जारी रहेगा।
सोरन प्रधान, नेता किसान संघर्ष मोर्चा, ने कहा कि यमुना प्राधिकरण में किसानों के मामले लंबे समय से लंबित हैं। आंदोलन के दबाव के बाद अधिकारियों ने इन मुद्दों पर गंभीरता दिखाई है। मोर्चा सभी लंबित मामलों के निस्तारण के लिए पूरी ताकत से प्रयास करेगा।
डॉ. रुपेश वर्मा, जिला अध्यक्ष, किसान सभा, गौतम बुद्ध नगर, ने कहा कि ग्रेटर नोएडा के एसआईटी मामलों में भी लंबे समय से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई थी। किसान संघर्ष मोर्चा के आंदोलन के बाद दो से तीन सप्ताह में निस्तारण का आश्वासन मिलना महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी होगी जब किसानों को न्याय मिलेगा और सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण होगा।
वीर सिंह नागर, नेता किसान संघर्ष मोर्चा, ने कहा कि किसान किसी भी प्रकार की वादाखिलाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो हजारों किसान दोबारा यमुना प्राधिकरण का घेराव करेंगे। मुकदमे दर्ज हों या गिरफ्तारियां हों, किसान अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
वार्ता में किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों सहित अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, डीसीपी ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ शैलेंद्र सहित किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा, सोरन प्रधान, डॉ. रुपेश वर्मा, वीर सिंह नागर, सचिन एडवोकेट, जयप्रकाश आर्य, मुकेश, गुरप्रीत, नरेश, करतार, निशांत, रोहित, देशराज, नितिन, उम्मेद, सुमित एडवोकेट, धर्मेंद्र एडवोकेट, उमेश भाटी एडवोकेट (पूर्व अध्यक्ष, बार), किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी, अजब सिंह भाटी, गबरी मुखिया, प्रवीण चौहान, अतुल यादव, अशोक भाटी, अशोक आर्य सहित 200 से अधिक अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आंदोलन के दबाव में बनी सहमति, अब समयबद्ध कार्रवाई का इंतजार
किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि 21 अक्टूबर के आंदोलन, गिरफ्तारियों और किसानों की एकजुटता के बाद 29 अक्टूबर की वार्ता में अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। एसआईटी मामलों के दो से तीन सप्ताह में निस्तारण, आबादी के खारिज मामलों की पुनः सुनवाई, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के भुगतान में तेजी और पुनर्वास के मकानों की रजिस्ट्री के संबंध में मिले आश्वासन महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि, जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित युवाओं के स्थायी रोजगार सहित कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अभी अनसुलझे हैं। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए अधिकारियों को धरातल पर समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी।
बैठक का कार्यवृत्त तैयार हो चुका है और उसकी आधिकारिक प्रतिलिपि प्राप्त होना बाकी है। प्रतिलिपि मिलते ही उसे सार्वजनिक किया जाएगा।
किसान संघर्ष मोर्चा ने दो टूक कहा कि किसानों के आबादी भूखंड, उचित मुआवजे, पुनर्वास, रोजगार और लंबित मामलों के समाधान की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक किसानों को उनका हक नहीं मिल जाता।


