जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज
“पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती हैं”
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और उससे जुड़े विवादों को लेकर देशभर में छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी क्रम में कुछ नेताओं और संगठनों ने उन छात्रों की मौतों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
जारी बयान में 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वह डॉक्टर बनने का सपना देख रही थीं और परीक्षा से जुड़ी परिस्थितियों के कारण मानसिक रूप से बेहद आहत थीं। बयान में दावा किया गया कि NEET विवाद से जुड़े तनाव ने कई परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है।
वक्ताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनकी निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता होती है तो उसका सबसे अधिक असर मेहनत करने वाले छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
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बयान में केंद्र सरकार से निम्नलिखित सवालों के जवाब मांगे गए—
- NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने के लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है?
- कथित पेपर लीक मामलों में दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
- छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा संबंधी तनाव को कम करने के लिए क्या विशेष व्यवस्था की जा रही है?
वक्ताओं ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं होना चाहिए।
“देश के करोड़ों छात्र निष्पक्ष परीक्षा और समान अवसर के हकदार हैं। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखना सरकार और संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।”
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