एयरपोर्ट प्रभावित युवाओं के रोजगार की मांग को लेकर अधिवक्ता समाज ने संभाला मोर्चा, 18 सितंबर से 14 गांवों में जनजागरण अभियान का ऐलान
अधिवक्ता बोले—जमीन के बदले नौकरी का वादा पूरा हो, सात साल से भटक रहे युवाओं को मिले रोजगार; मांगें पूरी नहीं हुईं तो जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार का अभियान चलेगा
जेवर/गौतम बुद्ध नगर। जेवर क्षेत्र में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रभावित युवाओं को रोजगार दिलाने की मांग को लेकर अधिवक्ता समाज ने आवाज बुलंद की है। एयरपोर्ट प्रभावित युवाओं के बीच पहुंचे अधिवक्ताओं ने उनकी रोजगार संबंधी समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों और युवाओं के भविष्य की लड़ाई में अधिवक्ता समाज उनके साथ खड़ा है। इस दौरान 18 सितंबर से एयरपोर्ट प्रभावित 14 गांवों में जनजागरण अभियान चलाने और मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की घोषणा की गई।
जमीन के बदले नौकरी का विकल्प चुनने वाले युवाओं का मुद्दा उठाया
अधिवक्ता समाज की ओर से बोलते हुए वक्ता ने कहा कि एयरपोर्ट निर्माण के दौरान प्रभावित परिवारों को जमीन के बदले मुआवजे अथवा नौकरी का विकल्प दिए जाने की बात कही गई थी। उनके अनुसार, करीब 840 लोगों ने नौकरी का विकल्प चुना था, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी अनेक युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरी का मुद्दा नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन, भविष्य और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा सवाल है। युवाओं ने रोजगार की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।
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अधिवक्ता समाज ने दिया संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का भरोसा
वक्ताओं ने कहा कि रोजगार की मांग करना युवाओं का लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। अधिवक्ता समाज प्रभावित युवाओं के साथ खड़ा है और उनकी जायज मांगों को कानूनी एवं लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाएगा।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि प्रभावित युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए। किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाए। वक्ताओं ने कहा कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा और युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए हर संभव संवैधानिक प्रयास किया जाएगा।
18 सितंबर से 14 गांवों में चलेगा जनजागरण अभियान
अधिवक्ता समाज ने घोषणा की कि 18 सितंबर से एयरपोर्ट प्रभावित 14 गांवों में घर-घर और गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के दौरान प्रभावित युवाओं की रोजगार संबंधी मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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वक्ताओं ने कहा कि अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा तथा जनप्रतिनिधियों और प्राधिकरण के समक्ष रोजगार की मांग को मजबूती से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं के साथ न्याय होना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार की चेतावनी
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि एयरपोर्ट निर्माण से प्रभावित 14 गांवों के लोगों की समस्याओं पर जनप्रतिनिधियों का पर्याप्त ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता के बीच आने वाले नेताओं से अब रोजगार और विकास के मुद्दों पर जवाब मांगा जाएगा।
उन्होंने घोषणा की कि यदि प्रभावित युवाओं की नौकरी संबंधी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो 14 गांवों में जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार का लोकतांत्रिक अभियान चलाया जाएगा। गांव-गांव पर्चे बांटकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और आगामी चुनावों में रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
किशोरपुर सहित प्रभावित गांवों की समस्याओं पर भी चर्चा
अधिवक्ताओं ने कहा कि एयरपोर्ट निर्माण से प्रभावित गांवों में जमीन अधिग्रहण, विस्थापन, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई सवाल हैं। किशोरपुर सहित प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और सुविधाओं को लेकर प्रशासन को स्पष्ट नीति के साथ काम करना चाहिए। प्रभावित युवाओं को वर्षों तक इंतजार कराने के बजाय उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए।
महापंचायत कर लिया जाएगा बड़ा निर्णय
अधिवक्ता समाज ने कहा कि 14 गांवों में जनजागरण अभियान पूरा होने के बाद महापंचायत आयोजित की जाएगी। महापंचायत में प्रभावित युवाओं और ग्रामीणों की राय से आगे की रणनीति तय की जाएगी।
वक्ताओं ने कहा कि जब तक प्रभावित युवाओं की रोजगार संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि नौकरी के विकल्प का चयन करने वाले पात्र प्रभावित युवाओं के मामलों की समीक्षा कर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई की जाए।
मुख्य मांगें:
- एयरपोर्ट प्रभावित पात्र युवाओं को नौकरी दिलाई जाए।
- जमीन के बदले नौकरी का विकल्प चुनने वाले परिवारों के मामलों का समाधान हो।
- प्रभावित युवाओं की रोजगार संबंधी शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच कर समयबद्ध कार्रवाई की जाए।
- प्रभावित गांवों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों पर ध्यान दिया जाए।
- प्रभावित परिवारों के अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता की रक्षा की जाए।
अधिवक्ता समाज ने कहा कि एयरपोर्ट प्रभावित युवाओं के रोजगार का मुद्दा क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा हुआ है। युवाओं और ग्रामीणों के साथ मिलकर इस मांग को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।


