किसान नेताओं का भाकियू अराजनैतिक से किनारा, बोले—अब अपने मुद्दों की लड़ाई खुद लड़ेंगे
डॉ. फकीरचंद पाल और विक्रम भाटी ने उठाए किसान मुद्दों पर सवाल, प्राधिकरण के खिलाफ सीधे संघर्ष का ऐलान
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में किसान मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच किसान नेताओं डॉ. फकीरचंद पाल और विक्रम भाटी ने भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक से अलग होकर अपने स्तर पर किसानों की समस्याओं की लड़ाई लड़ने की बात कही है। दोनों नेताओं ने प्रेसवार्ता के दौरान संगठन की कार्यशैली और किसानों की लंबित मांगों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
डॉ. फकीरचंद पाल ने कहा कि करीब दो वर्ष पहले किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन में जुड़े थे। उनके अनुसार किसानों की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत भूखंड सहित अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल थे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक आंदोलन और धरना चलने के बावजूद किसानों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो सका।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन जिस मुद्दे को लेकर शुरू हुआ था, समय के साथ उससे भटक गया। डॉ. पाल ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए उन्हें ठोस और निर्णायक तरीके से अपनी मांगों को उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब किसान अपने मुद्दों को अपने स्तर पर और अपने बैनर के माध्यम से उठाएंगे।
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प्राधिकरण के खिलाफ सीधे संघर्ष की बात
डॉ. फकीरचंद पाल ने प्राधिकरण से जुड़े किसानों के विभिन्न लंबित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की जमीन, मुआवजा और भूखंड से संबंधित समस्याओं का समाधान लंबे समय से लंबित है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में किसानों के पक्ष में आने वाले निर्णयों के बावजूद कई मामलों में किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अब किसानों की लड़ाई को लेकर उनका रुख स्पष्ट है और आगे की लड़ाई किसानों और प्राधिकरण के बीच सीधे संवाद एवं संघर्ष के माध्यम से लड़ी जाएगी।
वहीं किसान नेता विक्रम भाटी ने भी किसानों की समस्याओं और पूर्व में चलाए गए आंदोलनों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन किए जा रहे हैं, लेकिन कई मुद्दे अभी भी लंबित हैं। उनका कहना है कि किसान अब अपने अधिकारों के लिए स्वयं एकजुट होकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
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विक्रम भाटी ने कहा कि किसान संगठनों से जुड़े अनुभवों के बाद अब वे किसी संगठन के बैनर के बजाय किसानों के स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए सीधे संघर्ष करने पर जोर देंगे।
दोनों किसान नेताओं ने कहा कि किसानों की जमीन, 10 प्रतिशत भूखंड, मुआवजा, आबादी एवं प्राधिकरण से जुड़े अन्य लंबित मामलों का समाधान उनकी प्राथमिकता रहेगा। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का आह्वान किया।
प्रेसवार्ता में किसानों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में स्थानीय किसान मुद्दों को लेकर नई रणनीति तैयार कर आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी।


