फाइनल ईयर प्रोजेक्ट्स से पेटेंट योग्य आइडियाज की पहचान, सॉफ्टवेयर पेटेंटिंग और नवाचारों के व्यावसायीकरण पर हुई चर्चा
ग्रेटर नोएडा। जीएनआईओटी इंजीनियरिंग संस्थान, ग्रेटर नोएडा की सेंट्रल प्रोजेक्ट एंड रिसर्च कमेटी (CPRC) एवं IPR सेल के संयुक्त तत्वावधान में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय पर एक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन किया गया। संस्थान के कमरा नंबर 306 में आयोजित इस कार्यक्रम में बीटेक एवं एमसीए के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर्स और फैकल्टी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को बौद्धिक संपदा अधिकारों, पेटेंट प्रक्रिया और नवाचारों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राइटक्लिक कंसल्टिंग्स की मैनेजिंग पार्टनर सुश्री कृतिका कौर ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने पेटेंट की पात्रता, IPR फाइलिंग प्रक्रिया तथा शैक्षणिक परियोजनाओं के व्यावसायीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। संवादात्मक सत्र के दौरान उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के फाइनल ईयर प्रोजेक्ट्स में मौजूद संभावनाओं की पहचान कर उन्हें पेटेंट योग्य नवाचारों में कैसे बदला जा सकता है।
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सॉफ्टवेयर पेटेंटिंग और इनोवेटिव आइडियाज पर विशेष चर्चा
विशेषज्ञ वार्ता में भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा 3(k) के तहत सॉफ्टवेयर पेटेंटिंग से जुड़ी चुनौतियों, प्रायर आर्ट सर्च तथा नए विचारों को बौद्धिक संपदा के रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। सुश्री कृतिका कौर ने बताया कि किसी भी नवाचार को पेटेंट कराने से पहले उसकी नवीनता और पेटेंट योग्यता का उचित मूल्यांकन करना आवश्यक है।
उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों को अपने शोध एवं नवाचारों की पहचान कर उन्हें समय रहते पेटेंट के माध्यम से संरक्षित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शैक्षणिक परियोजनाओं को व्यावहारिक उपयोग और व्यावसायिक संभावनाओं से जोड़ने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
शोध और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने की पहल
यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) धीरज गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। उनके निरंतर प्रोत्साहन से संस्थान में अनुसंधान, तकनीकी विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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कार्यक्रम का नेतृत्व CPRC प्रमुख प्रो. (डॉ.) गंभीर सिंह तथा IPR सेल के संयोजक डॉ. इशरत अली ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विशेषज्ञ सत्र शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपने शोध कार्यों की बौद्धिक संपदा संबंधी संभावनाओं को समझने में मदद करते हैं। साथ ही, ये पहल संस्थान में एक मजबूत अनुसंधान एवं नवाचार इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने आने वाले शैक्षणिक वर्ष में अधिक से अधिक पेटेंट फाइल करने और गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
फैकल्टी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग
विशेषज्ञ वार्ता के दौरान प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित विभिन्न पहलुओं को समझा और नवाचारों के संरक्षण की प्रक्रिया पर उपयोगी जानकारी प्राप्त की। सत्र का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस आयोजन के माध्यम से जीएनआईओटी इंजीनियरिंग संस्थान ने शैक्षणिक परियोजनाओं को शोध, पेटेंट और व्यावहारिक नवाचार से जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। कार्यक्रम से संस्थान में बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भविष्य के नवाचारों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


