सीता स्वयंवर, श्रीराम-सीता विवाह और कैकेयी-मंथरा संवाद ने दर्शकों को किया भावविभोर, वनवास के प्रसंग पर नम हुईं आंखें
ग्रेटर नोएडा, 16 अक्टूबर 2026। श्री धार्मिक रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 में छठे दिन भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग, भगवान परशुराम-लक्ष्मण संवाद, श्रीराम-सीता विवाह, माता सीता की विदाई, मंथरा-कैकेयी संवाद और श्रीराम वनवास की लीलाओं ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। पूरे रामलीला परिसर में प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारे गूंजते रहे। विवाह के प्रसंगों पर दर्शकों ने हर्षोल्लास व्यक्त किया, वहीं वनवास की लीला के दौरान अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के युवा अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे रामलीला का मंचन किया जा रहा है। 16 अक्टूबर को आयोजित लीला में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री कपिल देव अग्रवाल, संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास विभाग के राज्यमंत्री श्री जसवंत सिंह सैनी तथा दादरी विधायक श्री तेजपाल नागर की उपस्थिति भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।
शिव धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां
संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी ने बताया कि सीता स्वयंवर के प्रसंग में महाराज जनक ने शर्त रखी कि जो भी शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में अनेक राजा-महाराजा और पराक्रमी योद्धा पहुंचे, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका। इससे दुखी होकर महाराज जनक ने अपनी चिंता व्यक्त की।
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महाराज जनक के वचनों से भगवान लक्ष्मण भावुक हो उठे और उन्होंने रघुवंश की वीरता का स्मरण कराया। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने शिव धनुष उठाया। जैसे ही उन्होंने प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, धनुष टूट गया और उसकी गूंज से स्वयंवर स्थल का वातावरण गूंज उठा।
धनुष भंग होने की सूचना पाकर भगवान परशुराम जनक दरबार पहुंचे। वहां भगवान लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा संवाद हुआ। भगवान श्रीराम ने अपने शांत एवं विनम्र वचनों से स्थिति को संभाला। अंततः भगवान परशुराम को श्रीराम के दिव्य स्वरूप का आभास हुआ और उन्होंने उन्हें आशीर्वाद देकर प्रस्थान किया। इस पूरे प्रसंग का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
श्रीराम-सीता विवाह और विदाई के प्रसंग ने किया भावुक
शिव धनुष भंग की सूचना अयोध्या पहुंचने पर महाराज दशरथ जनकपुर बारात लेकर पहुंचे। जनकपुर में अयोध्यावासियों का भव्य स्वागत हुआ और चारों भाइयों के विवाह का प्रसंग संपन्न हुआ। भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के दृश्य ने रामलीला परिसर को उत्सवमय बना दिया। इसके बाद माता सीता की विदाई का मार्मिक मंचन हुआ। पिता के घर से बेटी की विदाई के समय जनकपुरवासियों का भावुक दृश्य देखकर दर्शक भी भाव-विभोर हो उठे।
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अयोध्या में चारों भाइयों और उनकी वधुओं के आगमन पर राजमहल को भव्य रूप से सजाया गया। पूरे नगर में उत्सव का वातावरण था। इसके बाद महाराज दशरथ द्वारा भगवान श्रीराम को राजगद्दी सौंपने की तैयारी और मंथरा-कैकेयी संवाद का मंचन हुआ। कैकेयी द्वारा भरत के लिए राज्य तथा श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगने के प्रसंग ने कथा को भावनात्मक मोड़ दिया।
अंत में भगवान श्रीराम के वनवास प्रस्थान की लीला का मंचन किया गया। इस दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहरे भावनात्मक अनुभव से जोड़ दिया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और मंचन की सराहना की तथा जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान कर दिया।
आगामी दिनों में होंगे रामायण के प्रमुख प्रसंग
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से आगामी दिनों के मंचन की जानकारी भी दी गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 17 अक्टूबर को राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा प्रसंग, बाली वध और अशोक वाटिका से जुड़े प्रसंगों का मंचन होगा। 18 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं 19 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा श्रीराम-कुंभकरण और श्रीराम-रावण युद्ध के प्रसंग मंचित किए जाएंगे।
आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष का रामलीला एवं दशहरा महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से नई पीढ़ी को मर्यादा, त्याग, कर्तव्य, पारिवारिक संबंधों और धर्म के आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
पदाधिकारियों और गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक श्री राजकुमार नागर, श्री प्रदीप शर्मा, श्री शेर सिंह भाटी, श्री हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक श्री नरेश गुप्ता, संरक्षक श्री सुशील नागर, श्री धीरेंद्र भाटी, श्री धीरज शर्मा, श्री बालकिशन सफीपुर, श्री दिनेश गुप्ता, श्री पवन नागर, श्री मनोज गुप्ता, श्री सतीश भाटी, अध्यक्ष श्री आनंद भाटी, महासचिव श्रीमती ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष श्री अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा बदौली, श्री उमेश गौतम, श्री सत्यवीर मुखिया, श्रीमती रोशनी सिंह, श्री महेश कमांडो, श्री चैन पाल प्रधान, श्री जितेंद्र भाटी, श्री सुभाष भाटी, श्री मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी श्री अतुल आनंद, उपाध्यक्ष श्री फिरे प्रधान, श्री पी.पी. शर्मा, श्री श्याम सुंदर फौजी, श्री यशपाल नागर, सचिव श्रीमती ज्योति सिंह, श्रीमती गीता शागर, श्री राकेश भाटी, श्री भगवत भाटी, श्री तेज कुमार भाटी, श्री सुंदर भाटी, श्री पवन भाटी, श्री वीरपाल मावी और श्री जय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी का यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण बन रहा है। रामलीला के आगामी प्रसंगों को लेकर भी क्षेत्रवासियों में उत्साह बना हुआ है।


