किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को एक माह का अल्टीमेटम, 7 नवंबर के बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी
ग्रेटर नोएडा। भारतीय किसान यूनियन (कृषक) की किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर एनपीसीएल अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक प्रताप नागर ने की। बैठक में किसानों से जुड़ी बिजली संबंधी समस्याओं, कथित फर्जी मुकदमों, अधिक बिजली बिल और ट्यूबवेल कनेक्शन सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण नागर ने कहा कि किसानों की समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों पर फर्जी मुकदमे लगाए जा रहे हैं और उन्हें भारी-भरकम बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। किसानों को ट्यूबवेल पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पा रहा है तथा कई किसानों के बिजली कनेक्शन भी नहीं किए जा रहे हैं।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि किसानों को खेती के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इन सभी समस्याओं के समाधान को लेकर संगठन की ओर से एनपीसीएल के अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखी गईं।
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अधिकारियों के साथ हुई समस्याओं पर चर्चा
बैठक के दौरान एनपीसीएल के उपाध्यक्ष प्रवीन गोयल, सुबोध त्यागी, जीएम हरेंद्र सिंह, राजेश श्रीवास्तव, सुशील सुनार, नीरज सिंह सहित अन्य अधिकारियों के साथ किसानों की समस्याओं को लेकर वार्ता हुई।
संगठन के जिला अध्यक्ष विक्रम भाटी ने कहा कि अधिकारियों को किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए एक महीने का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन की ओर से 7 नवंबर के बाद एनपीसीएल के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन किसानों की समस्याओं को लेकर लगातार अधिकारियों के समक्ष आवाज उठाता रहा है और अब समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
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बड़ी संख्या में किसान पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक में प्रताप नागर, सतपाल नागर, विजय भाटी, विक्रम नागर, अनिल नागर, आशीष नागर, ललित भाटी, प्रवीन नागर, अमित भाटी, हनी नागर, सविन भाटी, यासिन खान, महेश सहित संगठन के पदाधिकारी एवं किसान मौजूद रहे।
संगठन ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में एनपीसीएल के खिलाफ आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।


