शक्ति स्वरूपा सोनू मलान: परंपराओं को तोड़कर थामा बस का स्टीयरिंग, बनीं नारी सशक्तीकरण की मिसाल
अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक रोज अलीगढ़ से नोएडा के बीच लगाती हैं चार चक्कर, करीब 540 किलोमीटर का सफर तय कर यात्रियों को पहुंचाती हैं मंजिल तक
### सोशल मीडिया पर 10 लाख से अधिक फॉलोअर्स, बचपन में ट्रैक्टर चलाने का शौक बना करियर; परिवार के सहयोग और सरकारी पहल से पूरा किया सपना
अलीगढ़, 18 अक्टूबर। नवरात्रि के पावन अवसर पर अलीगढ़ से नोएडा के बीच दौड़ती रोडवेज बस का स्टीयरिंग संभाल रहीं सोनू मलान नारी शक्ति, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं। पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन क्षेत्र में सोनू ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर अलग पहचान बनाई है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के पद पर कार्यरत सोनू प्रतिदिन करीब 540 किलोमीटर का सफर तय करती हैं और यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाती हैं।
सोनू की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सामाजिक रूढ़ियों और परंपरागत सोच से आगे बढ़कर अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। परिवहन जैसे क्षेत्र में महिला चालकों को अवसर मिलना और उनका जिम्मेदारी के साथ कार्य करना महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सोनू मलान ने साबित किया है कि हौसले बुलंद हों और अवसर मिले, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।
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मंडल की इकलौती महिला बस चालक, रोज तय करती हैं 540 किलोमीटर का सफर
अलीगढ़ के जट्टारी क्षेत्र के हजियापुर गांव की निवासी 28 वर्षीय सोनू मलान ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के रूप में कार्यभार संभाला था। वह अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक हैं। सोनू अलीगढ़ से नोएडा के बीच रोडवेज बस चलाती हैं और प्रतिदिन चार चक्कर लगाकर लगभग 540 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं।
जब यात्री बस की चालक सीट पर किसी महिला को देखते हैं, तो कई बार उनके चेहरे पर आश्चर्य दिखाई देता है। हालांकि, सोनू की कुशल ड्राइविंग, अनुशासन और कार्य के प्रति समर्पण देखकर यात्री उनकी सराहना करते हैं। अपने पेशे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता यह संदेश देती है कि किसी काम को महिला या पुरुष के दायरे में बांधने के बजाय योग्यता और मेहनत को महत्व दिया जाना चाहिए।
12 साल की उम्र में चलाया ट्रैक्टर, फिर बस बनीं जुनून
सोनू मलान को बचपन से ही वाहन चलाने का शौक था। महज 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने गांव में खेती-किसानी के कार्यों के लिए ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे यह शौक उनके जुनून में बदल गया और उन्होंने इसे अपना पेशा बनाने का सपना देखा।
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वर्ष 2021 में जब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में महिला बस चालकों की नियुक्ति का अवसर आया, तो सोनू ने भी आवेदन किया। चयनित महिला चालकों में अलीगढ़ की सोनू मलान और गाजियाबाद के सिकंदराबाद क्षेत्र की वेद कुमारी भी शामिल थीं। इस अवसर ने सोनू को अपने बचपन के शौक को करियर में बदलने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने मेहनत और आत्मविश्वास के साथ बस चालक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।
सोशल मीडिया पर भी छाईं सोनू, 10 लाख से अधिक फॉलोअर्स
सोनू मलान की लोकप्रियता केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी उनके लाखों प्रशंसक हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके यूट्यूब चैनल पर करीब दो लाख, इंस्टाग्राम पर लगभग डेढ़ लाख और फेसबुक पर करीब साढ़े छह लाख फॉलोअर्स हैं। इस तरह उनके विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर कुल फॉलोअर्स की संख्या 10 लाख से अधिक बताई जाती है।
सोनू बस चलाने से जुड़े अपने अनुभवों और वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करती हैं, जिन्हें बड़ी संख्या में लोग पसंद करते हैं। उनके वीडियो न केवल लोगों की जिज्ञासा बढ़ाते हैं, बल्कि महिलाओं को पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर अपने सपनों के लिए प्रयास करने की प्रेरणा भी देते हैं।
परिवार का मिला साथ, हौसले ने बदली सोच
सोनू मलान के लिए इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। शुरुआत में उन्हें ऐसी बातें भी सुननी पड़ीं कि बस चलाना पुरुषों का काम है। लेकिन सोनू ने इन धारणाओं को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हुए उन्होंने लगातार मेहनत की और अपनी क्षमता से पहचान बनाई।
इस सफर में उनके परिवार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सोनू के भाई भी परिवहन निगम में बस चालक हैं, जबकि उनके पिता शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं। परिवार के सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को मजबूती दी और वह अपने सपने को साकार करने में सफल रहीं।
सोनू के मुताबिक, बस में सफर करने वाली कई लड़कियां और महिलाएं उन्हें चालक की सीट पर देखकर सुरक्षित महसूस करती हैं और उनके काम की सराहना करती हैं। कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर अपने सपनों को पूरा करने का भरोसा भी जताती हैं।
नारी शक्ति और आत्मनिर्भरता की बनीं पहचान
सोनू मलान की उपलब्धि केवल एक महिला के बस चालक बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलती सामाजिक सोच और महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास की भी तस्वीर है। योगी सरकार की पहल से परिवहन क्षेत्र में अवसर मिलने के बाद सोनू ने अपनी मेहनत से उस अवसर को उपलब्धि में बदला है।
नवरात्रि के दौरान सोनू की कहानी नारी शक्ति के उस स्वरूप को सामने लाती है, जो चुनौतियों से घबराता नहीं, बल्कि अपने साहस और संकल्प से नई राह बनाता है। अलीगढ़ से नोएडा तक बस का स्टीयरिंग संभालने वाली सोनू मलान आज उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती हैं।
सोनू मलान का सफर संदेश देता है कि सफलता के लिए न तो लिंग की सीमा मायने रखती है और न ही सामाजिक रूढ़ियां—जरूरत है तो केवल अवसर, मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की।


