कौशल विकास मंत्रालय एवं NEISBUD के सहयोग से शिक्षकों को दी गई आधुनिक तकनीकों और उद्यमिता की जानकारी
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा स्थित जीएनआईओटी इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट (GNIOT) के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग द्वारा भारत
सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development & Entrepreneurship) के सहयोग से तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 6 जून से 8 जून 2026 तक नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट (NEISBUD), नोएडा में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का विषय “Entrepreneurship Development and E-Waste Management” रखा गया, जिसमें विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, विशेषज्ञों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को ई-कचरे (E-Waste) के सुरक्षित प्रबंधन, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और निस्तारण की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना था।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल और तकनीकी विकास के साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप ई-कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं किया गया तो यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
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कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ई-वेस्ट प्रबंधन के साथ-साथ इस क्षेत्र में मौजूद उद्यमिता और रोजगार की संभावनाओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग और संसाधन पुनर्प्राप्ति (Resource Recovery) भविष्य के महत्वपूर्ण व्यवसायिक क्षेत्रों में से एक है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी योगदान दे सकता है।
जीएनआईओटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षकों को इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने का उद्देश्य उन्हें नवीनतम तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि वे छात्रों को नवाचार, सतत विकास और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित कर सकें।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने ई-वेस्ट प्रबंधन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं, सरकारी नीतियों, स्टार्टअप अवसरों तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान में इसकी भूमिका पर गहन चर्चा की। तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान भी किया।
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संस्थान प्रबंधन ने इस आयोजन को सफल बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को समृद्ध करते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पहल ‘ग्रीन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपनों को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।






