यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों को दी जा रही टोल छूट की सुविधा बिना पूर्व सूचना के बंद किए जाने के विरोध में किसानों के कड़े रुख के बाद आखिरकार टोल कंपनी और प्रशासन को झुकना पड़ा। किसान संघर्ष मोर्चा एवं विभिन्न किसान संगठनों द्वारा 3 जुलाई को जेवर टोल प्लाजा पर प्रस्तावित विशाल धरना एवं महापंचायत की घोषणा के बाद प्रशासन ने तत्काल पहल करते हुए किसान संगठनों के साथ वार्ता की, जिसके बाद किसानों की टोल सुविधा तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल कर दी गई। इसके साथ ही 3 जुलाई का प्रस्तावित धरना और महापंचायत फिलहाल स्थगित कर दी गई।
यमुना एक्सप्रेसवे के मीटिंग हॉल में आयोजित बैठक में प्रशासन की ओर से डीसीपी ग्रेटर नोएडा, एडीसीपी संतोष कुमार, यमुना प्राधिकरण के एसीईओ आशीष तथा ओएसडी शैलेन्द्र भाटिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में गौतमबुद्धनगर के विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
बैठक में अधिकारियों ने किसानों की प्रमुख मांग स्वीकार करते हुए बंद की गई टोल सुविधा को तत्काल प्रभाव से पुनः शुरू करने का आश्वासन दिया। प्रेस विज्ञप्ति जारी होने तक सभी पात्र किसान संगठनों की टोल सुविधा बहाल कर दी गई थी, जिसके बाद किसान संगठनों ने 3 जुलाई को प्रस्तावित धरना एवं महापंचायत स्थगित करने का निर्णय लिया।
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किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि देशभर की सड़कें किसानों की अधिग्रहित भूमि पर बनी हैं। ऐसे में जिन किसानों की जमीन पर एक्सप्रेसवे का निर्माण हुआ है, उनसे टोल वसूलना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़े किसानों की कई अन्य मांगें भी वर्षों से लंबित हैं, जिनमें दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा तथा 7 प्रतिशत आबादी के प्लॉट शामिल हैं।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि किसानों की भूमि पर बनी सड़क पर उन्हीं किसानों से टोल लेना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गौतमबुद्धनगर के अधिकांश किसानों की भूमि विभिन्न विकास परियोजनाओं में अधिग्रहित की गई है और उन्हें अन्य एक्सप्रेसवे क्षेत्रों की तरह आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के अधिकारों में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी।
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसानों की टोल छूट किसी की कृपा नहीं, बल्कि किसानों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसानों की सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की गई तो सभी किसान संगठन संयुक्त रूप से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। साथ ही भूमि अधिग्रहण, बकाया मुआवजा, 7 प्रतिशत आबादी के प्लॉट एवं अन्य लंबित समस्याओं का भी शीघ्र समाधान किए जाने की मांग की।
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बैठक के दौरान प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि किसानों से जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा एवं स्थायी समाधान के लिए 9 जुलाई 2026 को किसान संगठनों, यमुना प्राधिकरण और टोल कंपनी के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में मास्टर श्योराज, अनिल तालान, सुखबीर खलीफा, सोरन प्रधान, डॉ. रुपेश वर्मा, महेश ठाकुर, अमन ठाकुर, महेश कसाना, उदल यादव, कुंवरपाल प्रधान, गीता भाटी, ब्रजेश भाटी, रोहताश नागर, इरफान प्रधान, अनुज नागर, राजकुमार नागर, प्रेम प्रधान, श्रीपाल भाटी, मास्टर धर्म सिंह, आनंद सिंह, जगवीर नम्बरदार, वीर सिंह नागर, विनोद राजपूत, नवाब कुरेशी, जयपाल शर्मा, गौरव राजपूत, देशराज नागर, राजसिंह ठेकेदार, रविन्द्र नागर, मेहरबान अली, रुपन खारी, सुभाष भाटी, उमेद एडवोकेट, पप्पे नागर, जेपी नागर, गोलू प्रधान, संदीप भाटी, रहीस ठेकेदार सहित विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।






