किसानों की समस्याओं पर बोले किसान नेता- मास्टर श्यौराज,सभी संगठनों को एकजुट होकर उठानी होगी आवाज, 7% भूखंड सहित लंबित मांगों के समाधान की मांग
यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसानों ने उठाए सवाल, बोले,14 महीने से इंतजार, अब किसानों की पीड़ा सुने प्रशासन
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे और क्षेत्रीय विकास से जुड़े किसानों की लंबित समस्याओं को लेकर किसान नेताओं ने प्रशासन और विभिन्न किसान संगठनों से एकजुट होकर किसानों की आवाज उठाने की अपील की है। किसान नेता ने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसानों को उनके अधिकारों का उचित लाभ अब तक नहीं मिल पाया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में किसान लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
किसान नेता ने कहा कि क्षेत्र के ऐसे किसान भी हैं जो किसी संगठन से जुड़े हुए नहीं हैं और अपने अधिकारों के लिए स्वतंत्र रूप से धरने पर बैठे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इन किसानों को भी बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी जाएं और उनके साथ वार्ता की जाए। उन्होंने कहा कि किसान किसी राजनीतिक या संगठनात्मक पहचान के कारण नहीं, बल्कि अपनी जमीन और अधिकारों से जुड़ी समस्याओं के कारण आंदोलन कर रहे हैं।
7 प्रतिशत आवासीय भूखंड की मांग प्रमुख मुद्दा
मास्टर श्यौराज किसान नेता ने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जमीन लिए जाने के समय 7 प्रतिशत आवासीय भूखंड दिए जाने का मुद्दा प्रमुख रहा है। उनका दावा है कि पूर्व में किसानों के साथ इस संबंध में बातचीत हुई थी और पत्राचार भी किया गया था, जिसके आधार पर भूखंड संबंधी मांग को आगे बढ़ाया गया।
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उन्होंने कहा कि किसानों की मांग केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं है। आबादी के मामलों का निस्तारण, नए भूमि अधिग्रहण कानून का उचित क्रियान्वयन, अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा, लंबित अंतर धनराशि, किसानों के बच्चों को रोजगार तथा क्षेत्रीय विकास में किसानों की भागीदारी जैसी कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं।
मास्टर श्यौराज. किसान नेता ने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन प्रभावित किसानों और उनके परिवारों को विकास का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने किसानों के बच्चों को स्थानीय परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी मांग की।
सभी किसान संगठनों से एकजुट होने की अपील
किसान नेता ने कहा कि आज क्षेत्र में कई किसान संगठन सक्रिय हैं। उन्होंने सभी संगठनों के राष्ट्रीय एवं स्थानीय पदाधिकारियों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर किसानों की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करें। उन्होंने कहा कि विचारधारा अलग हो सकती है, संगठन अलग हो सकते हैं, लेकिन किसानों की पीड़ा और उनके अधिकारों के मुद्दे पर सभी को एक मंच पर आना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि यदि किसी संगठन का आंदोलन अलग तरीके से चल रहा है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए और सभी किसान संगठनों से केवल सहयोग एवं समर्थन की अपील की जा सकती है।
शांतिपूर्ण आंदोलन और वार्ता पर जोर
मास्टर श्यौराज. ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रख रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से भी किसानों के साथ वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की। उनका कहना है कि आंदोलनकारियों को अलग-अलग नाम देकर उनकी आवाज को कमजोर करने के बजाय उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसान किसी व्यवस्था के विरोध में नहीं बल्कि अपने अधिकार और न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। यदि सभी किसान संगठन और प्रभावित किसान एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएं तो सरकार और प्रशासन तक किसानों की समस्याओं को मजबूती से पहुंचाया जा सकता है।
किसान नेता ने अंत में कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसानों के अधिकारों से जुड़े दस्तावेज एवं पूर्व पत्राचार उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य किसान संगठनों को भी ये दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि तथ्यों के आधार पर किसानों की मांग को मजबूती से उठाया जा सके।


