समझौते के अनुरूप समान व्यवस्था लागू करने की मांग
64.70% अतिरिक्त प्रतिकर के बाद शेष 4% आबादी भूखंड क्यों रोका जा रहा? 44 गांवों के किसानों का सवाल
22 अक्टूबर से परिवार सहित अनिश्चितकालीन किसान सत्याग्रह की घोषणा, समझौते के अनुरूप समान व्यवस्था लागू करने की मांग
गौतम बुद्ध नगर,
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़े भूमि अधिग्रहण एवं आबादी भूखंड के मुद्दे को लेकर 44 गांवों के प्रभावित किसानों ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर शेष 4% आबादी भूखंड दिए जाने की मांग उठाई। किसानों ने कहा कि समझौते के आधार पर जब 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर दिया जा चुका है और कई किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड दिए जा चुके हैं, तो पात्र एवं वंचित किसानों के शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड का मामला अब तक लंबित क्यों है।
किसानों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति अथवा अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और समझौते के अनुरूप अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर है। किसानों का कहना है कि यदि समान परिस्थितियों वाले किसानों के एक वर्ग को आबादी भूखंड दिए गए हैं, तो अन्य पात्र किसानों के मामलों में भी समान नीति लागू होनी चाहिए।
“64.70% अतिरिक्त प्रतिकर दिया तो शेष 4% भूखंड पर स्थिति स्पष्ट करे प्राधिकरण”
प्रेस वार्ता में किसानों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े समझौते के तहत किसानों के हित में किए गए प्रावधानों को समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। किसानों का सवाल है कि जब समझौते के आधार पर 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर का भुगतान किया जा चुका है और कुछ किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड भी आवंटित किए गए हैं, तो शेष पात्र किसानों के 4 प्रतिशत आबादी भूखंड का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा।
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किसानों ने प्राधिकरण से मांग की कि लंबित मामलों की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए और पात्र किसानों को भूखंड आवंटन के संबंध में समयबद्ध निर्णय लिया जाए।
प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
किसानों ने कहा कि विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के लिए प्राधिकरण द्वारा संसाधनों की व्यवस्था की जाती है, लेकिन किसानों के लंबित आबादी भूखंडों के मामले में जमीन और धन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठते हैं। किसानों ने प्राधिकरण की भूमि एवं संसाधनों की स्थिति को लेकर पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
इसके साथ ही किसानों ने लंबे समय से प्राधिकरण में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के पक्ष में नहीं हैं और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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22 अक्टूबर से परिवार सहित अनिश्चितकालीन किसान सत्याग्रह
किसानों ने घोषणा की कि यदि शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग पर शीघ्र ठोस समाधान नहीं किया गया, तो 22 अक्टूबर 2026 से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के समक्ष परिवार सहित अनिश्चितकालीन किसान सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।
किसानों के अनुसार आंदोलन में महिलाएं, युवा और किसान परिवारों के सदस्य भी शामिल होंगे। किसानों ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा।
किसानों ने बताया कि मांगों को लेकर पूर्व में मौन जुलूस, भूख हड़ताल तथा भारी बारिश के बीच घोड़ी-बछेड़ा किसान शहीद पार्क से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तक पैदल मार्च जैसे कार्यक्रम किए जा चुके हैं। किसानों का कहना है कि इसके बावजूद समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
किसानों की प्रमुख मांगें
- समझौते के अनुसार पात्र एवं वंचित किसानों को शेष 4% आबादी भूखंड दिए जाएं।
- समान परिस्थितियों वाले पात्र किसानों के लिए एक समान नीति लागू की जाए।
- 4% आबादी भूखंड से जुड़े लंबित मामलों पर समयबद्ध निर्णय लिया जाए।
- प्राधिकरण की भूमि एवं संसाधनों की स्थिति की पारदर्शी जानकारी किसानों के समक्ष रखी जाए।
- अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार अथवा अनियमितता के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
- 22 अक्टूबर से प्रस्तावित सत्याग्रह के दौरान किसानों एवं उनके परिवारों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
किसानों ने कहा कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपने अधिकारों की मांग से पीछे भी नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर दिए जाने और अनेक किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड मिलने के बाद शेष पात्र किसानों के 4 प्रतिशत भूखंड के मामले में प्राधिकरण को स्पष्ट और पारदर्शी निर्णय लेना चाहिए।
प्रेस वार्ता के दौरान संतराम प्रधान, कपिल गुर्जर, अमित भाटी, मोहित (जुनपत), अभय भाटी, मुखिया जी, देवेंद्र प्रधान, मदन मुखिया सहित अनेक किसान एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।


