“MSP बढ़ोतरी के नाम पर किसानों को निराश किया गया” — कृष्ण नागर
भारतीय किसान यूनियन (कृषक) ने फसलों के समर्थन मूल्य और बढ़ती कृषि लागत को लेकर उठाए सवाल
नई दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन (कृषक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण नागर ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर किसानों की चिंताओं को उठाते हुए कहा कि बढ़ती कृषि लागत के बीच फसलों के समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
कृष्ण नागर ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, डीजल, बिजली, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मशीनरी जैसी आवश्यक चीजों पर किसानों का खर्च बढ़ता जा रहा है। ऐसे में किसानों की मांग है कि फसलों का मूल्य ऐसा हो जिससे उन्हें खेती की लागत निकालने के बाद उचित एवं लाभकारी आय प्राप्त हो सके।
हालांकि, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार रबी विपणन सीजन 2026-27 में गेहूं का MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष के ₹2,425 से ₹160 अधिक है। अन्य रबी फसलों में भी सरकार ने वृद्धि की है—जौ में ₹170, चने में ₹225, मसूर में ₹300, रेपसीड-सरसों में ₹250 और कुसुम में ₹600 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
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कृष्ण नागर ने कहा कि सरकारी MSP आंकड़ों और किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत के बीच की स्थिति पर व्यापक चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसा लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए जिससे खेती घाटे का सौदा न बने और किसान सम्मानपूर्वक अपना जीवनयापन कर सके।
उन्होंने कहा कि किसान केवल MSP की घोषणा नहीं, बल्कि फसल की वास्तविक लागत, बाजार भाव और प्रभावी खरीद व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट एवं मजबूत व्यवस्था चाहते हैं।
कृष्ण नागर ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया जाता रहेगा और संगठन किसानों को उनकी उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा।
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