‘रेजिंग होलिस्टिक किड्स’ और ‘अंडरस्टैंडिंग द लाइफ ऑफ अ टीनएजर’ सत्रों में अभिभावकों को मिला प्रभावी पालन-पोषण का मार्गदर्शन
ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा के स्वर्ण नगरी स्थित जी.डी. गोयंका पब्लिक स्कूल में अभिभावकों के मार्गदर्शन के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों की भावनात्मक जरूरतों, व्यवहार और विकास के विभिन्न पहलुओं के प्रति जागरूक करना तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए सकारात्मक पारिवारिक वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता श्री कमलनीत सिंह ने अभिभावकों को बच्चों के पालन-पोषण, प्रभावी संवाद और उनकी भावनाओं को समझने से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के बेहतर विकास के लिए उनके साथ विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित करना, उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनना और उनकी भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना बेहद जरूरी है।
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कार्यशाला को बच्चों की आयु और विकास के विभिन्न चरणों के अनुरूप दो सत्रों में विभाजित किया गया। प्री-नर्सरी से कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों के लिए ‘रेजिंग होलिस्टिक किड्स’ विषय पर सत्र आयोजित किया गया। इसमें बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए आवश्यक पहलुओं पर चर्चा की गई।
वहीं, कक्षा छह से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों के लिए ‘अंडरस्टैंडिंग द लाइफ ऑफ अ टीनएजर’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें किशोरावस्था के दौरान बच्चों में होने वाले शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों को समझने, उनके साथ बेहतर संवाद स्थापित करने तथा इस संवेदनशील अवस्था में उन्हें उचित मार्गदर्शन देने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला में अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वक्ता द्वारा साझा किए गए सुझावों में गहरी रुचि दिखाई। दोनों सत्रों ने अभिभावकों को बच्चों की बदलती जरूरतों को समझने और उनके साथ अधिक सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण संबंध विकसित करने की दिशा में प्रेरित किया।
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विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रेणु सहगल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला ने विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय का उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, भावनात्मक मजबूती और सामाजिक विकास को भी प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। बच्चों को समझने, उनकी भावनाओं का सम्मान करने और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने से उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत होती है।


