संयुक्त किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अखिल भारतीय महाधिवेशन सम्पन्न
केएस सभागार, नई दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के तत्वावधान में राष्ट्रीय अखिल भारतीय महाधिवेशन का आयोजन किया गया। महाधिवेशन में देशभर से किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) का विरोध करते हुए किसानों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
सम्मेलन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, सरकारी खरीद की गारंटी, किसानों की संपूर्ण कर्ज़ माफी, भूमि अधिग्रहण, बिजली के निजीकरण सहित कई अहम विषयों पर प्रस्ताव रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि “कॉरपोरेट के लिए फ्री ट्रेड और किसानों के लिए बर्बादी मंजूर नहीं” तथा “MSP की कानूनी गारंटी के बिना खाद्य सुरक्षा संभव नहीं है।”
वरिष्ठ किसान नेता चौधरी युद्धवीर ने किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों की स्मृति में सिंधु बॉर्डर पर भव्य स्मारक बनाने की मांग उठाई। उन्होंने युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि सरकारें किसान संगठनों को कमजोर करने और उन्हें विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की लड़ाई एकजुटता से ही जीती जा सकती है तथा आज देश का युवा और छात्र वर्ग भी किसान आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ा है।
महाधिवेशन में गौतमबुद्ध नगर से भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अशोक भाटी, दादरी जिलाध्यक्ष मनोज मावी, अनिल खारी, सिंहराज गुर्जर, गजेंद्र रेक्सवाल, अजय गुर्जर, सचिन अवाना, मनोज अवाना, राजा चौधरी, आजाद चौधरी, यादराम नेताजी, रामपाल नेताजी, विनोद अधाना, सुमित तंवर, धीरेंद्र भाटी, अनूप नागर, अमित सहित अनेक किसान प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
महाधिवेशन में किसानों ने एकजुट होकर कृषि, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
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