अलीगंज अग्निकांड की जांच तेज, एसआईटी ने घटनास्थल का किया निरीक्षण, घायलों से भी की पूछताछ
मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एसआईटी, एफएसएल ने जुटाए अहम साक्ष्य
लखनऊ, अलीगंज अग्निकांड की जांच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर युद्धस्तर पर जारी है। घटना की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए गठित दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया और केजीएमयू में भर्ती घायलों से मुलाकात कर घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई।
एसआईटी के सदस्य अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बिल्डिंग के विभिन्न हिस्सों का जायजा लिया और घटना से जुड़े साक्ष्यों का परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम भी मौजूद रही, जिसने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण नमूने एकत्र किए।
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि घटनास्थल की विस्तृत फोटोग्राफी कराई गई है तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े व्यक्तियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी, जिसके बाद जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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वहीं एडीजी प्रवीण कुमार ने बताया कि एफएसएल टीम ने जले हुए उपकरणों, विद्युत तारों, मलबे और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को संग्रहित किया है। इन साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े प्रत्येक विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी की जांच की जा रही है तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी।
घटनास्थल के निरीक्षण के बाद एसआईटी टीम ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पहुंचकर उपचाराधीन घायलों से भी मुलाकात की और घटना के समय की परिस्थितियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। घायलों के बयान जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर घटनास्थल का निरीक्षण किया था तथा अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही एसआईटी का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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अब तक इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, जबकि चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।






