सीआईआई हेल्थकेयर समिट 2026 में जीआईएमएस का नवाचार मॉडल बना आकर्षण, दो हेल्थकेयर स्टार्टअप्स ने बिखेरा जलवा
गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने सीआईआई हेल्थकेयर समिट 2026 में अपने नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाई। समिट में जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) में इनक्यूबेट किए गए दो हेल्थकेयर स्टार्टअप्स मैट्री (Matri) और बीवेल (BeWell) ने “डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़” सत्र के दौरान अपने अभिनव स्वास्थ्य समाधान प्रस्तुत किए।
इस सत्र में देशभर के निवेशकों, चिकित्सकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों एवं नीति-निर्माताओं ने भाग लिया और दोनों स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीकी समाधानों की सराहना की। स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और तकनीक के बेहतर उपयोग को लेकर जीआईएमएस की पहल को व्यापक प्रशंसा मिली।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
समिट के दौरान सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राहुल सिंह को “डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़” सत्र की अध्यक्षता (Session Chair) के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों, मेडटेक नवाचारों और स्टार्टअप्स की भूमिका पर सार्थक चर्चा का संचालन किया।
कार्यक्रम में जीआईएमएस के नवाचार एवं इनक्यूबेशन मॉडल को विशेष रूप से सराहा गया। दिल्ली सहित देश के कई प्रतिष्ठित सरकारी एवं निजी अस्पतालों की उपस्थिति में जीआईएमएस को एक ऐसे सरकारी चिकित्सा संस्थान के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने स्टार्टअप इनक्यूबेशन, क्लिनिकल वैलिडेशन, उद्योग सहयोग, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला सशक्त इकोसिस्टम विकसित किया है।
इस अवसर पर डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर जीआईएमएस के नवाचार मॉडल को मिली पहचान संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि जीआईएमएस का उद्देश्य चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहाँ उनके नवाचार प्रभावी स्वास्थ्य समाधानों के रूप में मरीजों तक पहुँच सकें।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
जीआईएमएस का सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन लगातार हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को क्लिनिकल मार्गदर्शन, अनुसंधान सहयोग, नियामकीय सहायता, उद्योग साझेदारी और निवेशकों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। संस्थान की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकारी मेडिकल संस्थान भी स्वास्थ्य नवाचार और मेडटेक स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।






