तीन दिवसीय एक्सपो में 200 से अधिक प्रदर्शक और जल क्षेत्र के विशेषज्ञ हुए शामिल, ईटीपी-एसटीपी-जेडएलडी पर तकनीकी मास्टरक्लास ने बढ़ाया ज्ञान-विनिमय
नई दिल्ली, भारत मंडपम में आयोजित ईएडब्ल्यू ग्लोबल एक्वा एक्सपो 2026 के तीन दिवसीय 21वें संस्करण का शनिवार को समापन हुआ। जल क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, कारोबार, निवेश, बाजार तक पहुंच और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस एक्सपो में देश-विदेश से जल क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों, तकनीकी कंपनियों, यूटिलिटी, ईपीसी कंपनियों, सलाहकारों, निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
अर्थ वाटर फाउंडेशन द्वारा आयोजित और एसोचैम के लीड इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में आयोजित एक्सपो की थीम ‘शेपिंग द फ्यूचर ऑफ वाटर थ्रू इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी एंड कोलैबोरेशन’ रही। आयोजन के दौरान जल क्षेत्र में नई तकनीकों, टिकाऊ समाधानों और कारोबारी साझेदारियों पर विशेष जोर दिया गया।
ईटीपी, एसटीपी और जेडएलडी पर तकनीकी प्रशिक्षण
एक्सपो के अंतिम दिन ईएडब्ल्यू वाटर एकेडमी के तहत ‘ईटीपी, एसटीपी एंड जेडएलडी डिजाइन कैलकुलेशन एंड ट्रबलशूटिंग’ विषय पर तकनीकी मास्टरक्लास आयोजित की गई। डॉ. लोकेश कुमार के नेतृत्व में हुए इस सत्र में प्लांट इंजीनियरों, ऑपरेटरों, सलाहकारों, ईपीसी टीमों, नगर निकाय एवं यूटिलिटी कर्मियों, औद्योगिक जल प्रबंधकों, युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
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मास्टरक्लास में प्लांट डिजाइन एवं कैलकुलेशन, तकनीकी समस्याओं के समाधान, अनुपालन तथा जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बी2बी बैठकों और तकनीकी साझेदारी पर रहा जोर
तीन दिवसीय आयोजन के दौरान बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकों और तकनीकी साझेदारी को भी प्रमुखता दी गई। ग्लोबल वाटर बिजनेस लाउंज में यूटिलिटी, ईपीसी कंपनियों, निवेशकों और निर्यातकों के बीच बी2बी संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराया गया।
इसके अलावा गवर्नमेंट एंड फैसिलिटेशन हब तथा एसईपीसी एक्सपोर्ट प्रमोशन एंड मार्केट इंफॉर्मेशन टेबल के माध्यम से बाजार और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वहीं इनोवेशन स्पॉटलाइट एरीना में नई तकनीकों, उत्पादों और स्टार्टअप समाधानों का प्रदर्शन किया गया।
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पहले दिन तकनीक, नीति और सर्कुलर वाटर इकोनॉमी पर चर्चा
एक्सपो के पहले दिन ‘नेविगेटिंग इंडियाज वाटर ट्रांजिशन: टेक्नोलॉजी, पॉलिसी एंड सर्कुलैरिटी’ विषय पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। इनमें इंडिया वाटर मैंडेट 2030, ड्राइविंग इंडस्ट्रियल वाटर सिक्योरिटी फॉर विकसित भारत 2047, औद्योगिक जल क्षेत्र में क्षमता निर्माण, स्मार्ट वाटर 4.0, एआई, वेस्ट-टू-वेल्थ, सर्कुलर वाटर इकोनॉमी और जल अवसंरचना की जलवायु अनुकूलता जैसे विषय प्रमुख रहे।
इन सत्रों में जल शक्ति मंत्रालय, एसोचैम, दिल्ली जल बोर्ड, उद्योग जगत और जल प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
दूसरे दिन वैश्विक जल कारोबार और जल सुरक्षा पर मंथन
दूसरे दिन का फोकस ग्लोबल वाटर बिजनेस एंड रेजिलिएंस पर रहा। वर्ल्ड सस्टेनेबल वाटर समिट, वाटर सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर एंड पार्टनरशिप्स तथा साउथ एशिया रेनवाटर फोरम के तहत भारतीय जल कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार की संभावनाओं, जल अवसंरचना के वित्तपोषण, जल सुरक्षा, वर्षा जल संचयन और समुदायों की भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार दुर्गा शंकर मिश्रा, झारखंड सरकार के प्रधान सचिव प्रशांत कुमार, जल संरक्षण विशेषज्ञ एवं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पद्मश्री उमाशंकर पांडेय सहित देश-विदेश के अनेक विशेषज्ञों ने भाग लिया।
साझेदारियों को जमीन पर उतारना अगला लक्ष्य : शिवानी घोरावत
अर्थ वाटर फाउंडेशन की संस्थापक शिवानी घोरावत ने कहा कि जल क्षेत्र के किसी भी मंच की सफलता इस बात से तय होती है कि उससे कितनी सार्थक साझेदारियां और नए अवसर सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस संस्करण में तकनीकी कंपनियों, खरीदारों, यूटिलिटी, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर आने का अवसर मिला, जिससे कारोबार, ज्ञान-विनिमय और सहयोग के नए अवसर बने हैं।
उन्होंने कहा कि अब फोकस इन संपर्कों और साझेदारियों को ऐसे व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर है, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
आयोजन के दस्तावेज के अनुसार एक्सपो में 200 से अधिक प्रदर्शक, 5,000 से अधिक पेशेवर, 50 से अधिक वक्ता और 500 से अधिक बी2बी बैठकों का लक्ष्य रखा गया था। अंतिम आंकड़ों की पुष्टि आयोजन के बाद की जानी थी।
2027 में हैदराबाद और नई दिल्ली में होगा अगला आयोजन
ईएडब्ल्यू ग्लोबल एक्वा एक्सपो का अगला दक्षिण भारत संस्करण फरवरी 2027 में हैदराबाद में आयोजित किया जाएगा, जबकि इसका 22वां राष्ट्रीय संस्करण अगस्त 2027 में नई दिल्ली में आयोजित होने की घोषणा की गई है।
एक्सपो के माध्यम से जल क्षेत्र में तकनीक, कारोबार, बाजार तक पहुंच, निवेश और ज्ञान-विनिमय को एक साझा मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।






