नए नोएडा के 13 गांवों के किसानों का ऐलान: नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू किए बिना नहीं देंगे एक इंच जमीन
मिल्क खंडेरा की महापंचायत में किसानों ने भरी हुंकार, ₹20 हजार प्रति वर्ग मीटर मुआवजा, 20 प्रतिशत विकसित भूखंड और परिवार के प्रत्येक बालिग सदस्य को रोजगार देने की उठाई मांग
मिल्क खंडेरा, गौतमबुद्ध नगर। नए नोएडा के अंतर्गत अधिसूचित 13 गांवों के किसानों ने अपनी जमीन और अधिकारों की लड़ाई को लेकर रविवार को मिल्क खंडेरा गांव में महापंचायत आयोजित की। एडवोकेट ऋषि टाइगर एवं प्रिंस टाइगर के नेतृत्व में आयोजित इस महापंचायत में किसान संघर्ष मोर्चा और किसान सभा के नेताओं सहित सैकड़ों प्रभावित किसानों ने हिस्सा लिया। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू किए बिना किसान अपनी एक इंच जमीन भी नहीं देंगे।
महापंचायत में किसानों ने स्पष्ट किया कि नए नोएडा के विकास के नाम पर उनकी जमीन का अधिग्रहण करने से पहले उन्हें कानून के तहत मिलने वाले सभी अधिकार और उचित मुआवजा सुनिश्चित करना होगा। किसानों ने ₹20,000 प्रति वर्ग मीटर मुआवजा, 20 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड और प्रत्येक प्रभावित परिवार के प्रत्येक बालिग सदस्य को रोजगार देने की मांग प्रमुखता से उठाई।
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12 साल से सर्किल रेट नहीं बढ़ने पर जनप्रतिनिधियों से उठाए सवाल
महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला अध्यक्ष एवं किसान संघर्ष मोर्चा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर में पिछले 12 वर्षों से सर्किल रेट में कोई वृद्धि नहीं हुई है। किसानों की बेशकीमती जमीनों का अधिग्रहण कम दरों पर किया जाता रहा है और अब नए नोएडा के नाम पर भी किसानों के साथ ऐसा ही होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि किसानों के इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी चिंताजनक है। किसान संघर्ष मोर्चा अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। इस लड़ाई में किसानों को जेल जाना पड़ा और अनेक मुकदमों का सामना करना पड़ा, लेकिन आंदोलन जारी रहा।
उन्होंने बताया कि किसानों के संघर्ष के परिणामस्वरूप मुआवजे की दर 4,100 रुपये से बढ़कर 6,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर हुई, लेकिन संघर्ष मोर्चा ने इसे अपर्याप्त मानते हुए स्वीकार नहीं किया। किसानों की मांग है कि उन्हें 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाए।
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20 प्रतिशत विकसित भूखंड किसानों का अधिकार: सूरन प्रधान
किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सूरन प्रधान ने कहा कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत प्रभावित किसानों को 20 प्रतिशत विकसित भूखंड मिलना चाहिए। इसके बावजूद प्राधिकरण की ओर से किसानों को केवल 6 प्रतिशत भूखंड देने की बात कही गई, जो किसानों की नजर में उनके अधिकारों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों से रोजगार के वादे किए गए थे, लेकिन आज भी अनेक किसान रोजगार के लिए भटक रहे हैं। रोजगार अथवा 11 लाख रुपये देने से जुड़े प्रावधानों को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। किसानों को उनके कानूनी अधिकारों के अनुसार पूरा लाभ मिलना चाहिए।
झूठे आश्वासनों से नहीं मानेंगे किसान: सुशील
किसान सभा के नेता सुशील ने कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं और अब किसी भी झूठे आश्वासन या वादाखिलाफी के भरोसे पीछे हटने वाले नहीं हैं। जब तक किसानों को उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
जबरन सर्वे और अधिग्रहण का होगा विरोध: ऋषि टाइगर
महापंचायत के आयोजक एडवोकेट ऋषि टाइगर ने कहा कि पंचायत में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी प्रावधान लागू होने तक किसान अपनी जमीन नहीं देंगे। गांवों में जबरन सर्वे, भूमि अधिग्रहण अथवा किसानों की सहमति और कानूनी अधिकारों की अनदेखी कर किसी भी प्रकार की कार्रवाई का विरोध किया जाएगा।
महापंचायत में किसानों की प्रमुख मांगें
- नए भूमि अधिग्रहण कानून के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाए।
- किसानों को 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाए।
- प्रत्येक प्रभावित किसान को 20 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड दिया जाए।
- प्रभावित किसान परिवार के प्रत्येक बालिग सदस्य को रोजगार अथवा निर्धारित वैधानिक प्रावधानों के अनुसार लाभ दिया जाए।
- किसानों की सहमति और कानूनी अधिकारों की अनदेखी कर जबरन भूमि अधिग्रहण न किया जाए।
13 गांवों के साथ आसपास के किसानों से भी एकजुट होने की अपील
महापंचायत के दौरान डॉ. रुपेश वर्मा ने सुनपुरा, खेड़ी और बनोटा सहित आसपास के गांवों के किसानों से भी इस लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नए नोएडा से प्रभावित सभी गांवों के किसानों को एक मंच पर आकर अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के लिए सामूहिक संघर्ष करना होगा।
महापंचायत में सरन प्रधान, सुशील, सुनपुरा के जय किशन, उम्मेद त्यागी, सलोनी सोलंकी, प्रधान मानसिंह, राधाचरण भाटी, नरेश नागर, बाबा करतार, लाल नागर, धर्मेंद्र एडवोकेट सहित सैकड़ों प्रभावित किसान मौजूद रहे।
महापंचायत के जरिए किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि नए नोएडा का विकास किसानों के अधिकारों, उचित मुआवजे और कानूनी प्रावधानों को सुनिश्चित किए बिना स्वीकार नहीं होगा। किसानों ने एकजुट होकर अपनी जमीन और हक की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।


