विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन में बोले सीएम, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से बनेगा विकसित भारत
वाराणसी, 13 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों का आह्वान करते हुए कहा कि नवाचार और अनुसंधान का उद्देश्य केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण, जनकल्याण और आर्थिक उन्नति से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, आयुर्वेद, उद्यम और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं, जिनका उपयोग देश को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री शनिवार को वाराणसी में आयोजित विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान और अध्यात्म की पावन नगरी काशी में आयोजित यह अधिवेशन भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान और नवाचार के समन्वय का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संगम भारत को विकसित राष्ट्र बनाने और विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारत सदियों से रहा है ज्ञान और विज्ञान का वैश्विक केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान का इतिहास भले ही कुछ सौ वर्षों पुराना हो, लेकिन भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि नवाचारी और वैज्ञानिक सोच रखने वाला व्यक्ति था, जिसने प्राकृतिक खेती, पशुपालन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने जैसे मॉडल विकसित किए।
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भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर दिखाने का हुआ प्रयास
सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं, वामपंथी विचारधाराओं और भारत-विरोधी प्रवृत्तियों ने लंबे समय तक भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर आंकने का प्रयास किया। इसके बावजूद भारत की वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक विरासत आज भी विश्व को दिशा देने की क्षमता रखती है।
भारतीय जीवनशैली में विज्ञान का गहरा संबंध
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति का हर पहलू विज्ञान से जुड़ा हुआ है। रसोई में हल्दी और मसालों के उपयोग से लेकर कृषि और स्वास्थ्य संबंधी परंपराओं तक, भारतीय संस्कृति में वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता ने देश को बड़ी चुनौतियों से उबरने में मदद की।
ODOP और MSME ने बदली प्रदेश की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के माध्यम से पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है और बेरोजगारी दर तीन प्रतिशत से नीचे पहुंच गई है।
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प्रकृति के हर तत्व में अनुसंधान की संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने आयुर्वेदाचार्य जीवक का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और शोध की संभावनाएं देखती है। उन्होंने कहा कि आज भी कृषि, चिकित्सा, तकनीक, एमएसएमई और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के असीम अवसर उपलब्ध हैं।
हर अधिवेशन में हो नवाचार प्रदर्शनी और शोध प्रतियोगिता
मुख्यमंत्री ने विज्ञान भारती को सुझाव देते हुए कहा कि प्रत्येक राष्ट्रीय अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी, शोध एवं नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जानी चाहिए। उत्कृष्ट शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को सम्मानित करने के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों तथा अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें अपने नवाचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
1300 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि विज्ञान भारती के इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से 1300 से अधिक प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया है। यह आयोजन विज्ञान, अनुसंधान और भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है।
इस अवसर पर विज्ञान भारती के अखिल भारतीय पालक अधिकारी सुनील आंबेडकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. माण्डे, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी, आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा सहित अनेक वैज्ञानिक, शिक्षाविद और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में युवा वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अपने शोध और नवाचार को समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करें, ताकि भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व की भूमिका निभा सके।






