शिव शक्ति मंदिर प्रबंधन पर गंभीर आरोप, जिला प्रशासन ने गठित की जांच समिति
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर डेल्टा-2 स्थित शिव शक्ति मंदिर के प्रबंधन को लेकर उठे विवाद ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। मंदिर समिति में वित्तीय पारदर्शिता की कमी, ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा उपलब्ध न कराने संबंधी शिकायतों के बाद उपजिलाधिकारी (सदर), गौतमबुद्धनगर ने मामले की जांच के लिए समिति का गठन कर दिया है।
आरडब्ल्यूए डेल्टा-2 के उपाध्यक्ष रिंकू भाटी ने बताया कि मंदिर में पहले से विधिवत समिति होने के बावजूद नियमों को दरकिनार कर ट्रस्ट गठित किए जाने पर श्रद्धालुओं ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि मंदिर में प्राप्त होने वाली दानराशि, आजीवन एवं सामान्य सदस्यता शुल्क और ट्रस्ट गठन से संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक विवरण आज तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ट्रस्ट में कितने सदस्य बनाए गए, सदस्यता किस आधार पर दी गई और उनसे कितनी धनराशि प्राप्त हुई। इन सभी बिंदुओं पर मंदिर प्रबंधन द्वारा कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया है। समिति को ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया, बायलॉज के अनुरूप सदस्यता, आय-व्यय के रिकॉर्ड तथा वित्तीय प्रबंधन की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं एवं नागरिकों ने जांच का स्वागत करते हुए कहा है कि मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र है, इसलिए उसके संचालन में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाए।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
श्रद्धालुओं की प्रमुख मांगें:
- मंदिर की आय-व्यय का स्वतंत्र ऑडिट कर सार्वजनिक किया जाए।
- सदस्यता शुल्क एवं दानराशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- ट्रस्ट गठन की वैधानिकता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा अनियमितता सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर किसी व्यक्ति या समूह की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि समाज की आस्था का केंद्र है। इसलिए श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।






