जिम्स में चिकित्सा सेवाएं बाधित करने व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में विधिक कार्रवाई शुरू, उपद्रवी तत्व चिन्हित
ग्रेटर नोएडा,
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर 15 जून 2026 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। संस्थान, जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा कई दौर की वार्ता कर कर्मचारियों की मांगों के समाधान का आश्वासन दिया गया, किन्तु इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अस्पताल परिसर में धरने पर बने रहे।
अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार एवं हॉल क्षेत्र में चल रहे धरने के कारण मरीजों, तीमारदारों तथा चिकित्सा सेवाओं के संचालन में लगातार कठिनाइयां उत्पन्न हो रही थीं। चिकित्सा सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन एवं पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों से कई बार अनुरोध किया गया कि वे अस्पताल परिसर के भीतर ही किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर अपना धरना जारी रखें, जिससे मरीजों को असुविधा न हो और अस्पताल का नियमित कार्य प्रभावित न हो।
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दिनांक 24 जून 2026 को भी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से स्थान परिवर्तन करने का अनुरोध किया गया, किन्तु कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान कुछ व्यक्तियों द्वारा बाहरी तत्वों एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों को धरना स्थल पर बुलाया गया, जिन्होंने हंगामा, अभद्र व्यवहार तथा अस्पताल के प्रवेश द्वार को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया।
स्थिति को नियंत्रित करने तथा अस्पताल की सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा पुनः प्रदर्शनकारियों से वैकल्पिक स्थान पर जाने का आग्रह किया गया। इस दौरान कुछ कर्मचारी स्थान परिवर्तन के लिए तैयार हो गए, जबकि कुछ व्यक्तियों द्वारा धक्का-मुक्की एवं खींचतान की गई। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्तियों को वहां से हटाकर अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया।
घटना के दौरान संस्थान के कर्मचारियों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज, मारपीट तथा जान से मारने की धमकी दिए जाने के भी आरोप सामने आए हैं। साथ ही अस्पताल की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और चिकित्सा सेवाओं में बाधा उत्पन्न करने की शिकायत दर्ज कराई गई है। इन घटनाओं के कारण गंभीर मरीजों के उपचार एवं अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न हुई।
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अस्पताल के निदेशक द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर राजकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित करने तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न करने संबंधी धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस द्वारा घटनास्थल पर मौजूद उपद्रवी तत्वों की पहचान कर ली गई है और उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए मारपीट एवं लाठीचार्ज के आरोप पूर्णतः असत्य एवं निराधार हैं। घटना के दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरी कार्रवाई शांति एवं संयम के साथ संपन्न कराई गई।
वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी सहित अन्य चिकित्सकीय सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति पूर्णतः सामान्य एवं नियंत्रण में है। प्रशासन ने आमजन को आश्वस्त किया है कि मरीजों के हितों एवं चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।






